अर्थव्यवस्था की ऐसी की तैसी कर रहे आंदोलनकारी किसान, रोजाना हो रहा है 3500 करोड़ का नुकसान!

कृषि कानून के विरोध में पिछले 21 दिन से पंजाब, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा के कुछ किसान संगठन दिल्ली बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे हैं, अब ये आंदोलन देश की अर्थव्यवस्था को काफी नुकसान पहुंचा रहा है, बता दें कि आंदोलनकारी किसानों और सरकार के बीच अबतक 6 दौर की बातचीत हो चुकी है लेकिन कोई हल नहीं निकल सका है.

उद्योग चैंबर एसोचैम ने दावा किया है कि किसान आंदोलन से देश को हर दिन करीब 3500 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है. यह नुकसान लॉजिस्टिक लागत बढ़ने, श्रमिकों की कमी, टूरिज्म जैसी कई सेवाओं के न खुल पाने आदि के रूप में हो रहा है.

एक और उद्योग चैंबर कंफडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्रीज (CII) का भी कहना है कि पटरी पर लौट रही अर्थव्यवस्था को किसान आंदोलन से काफी नुकसान हो सकता है. एसोसिएटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने सरकार और किसानों से इस गतिरोध को दूर करने के लिए कोई रास्ता निकालने की मांग की है.

अगर जल्द ही आंदोलन न ख़त्म हुआ तो देश की अर्थव्यस्था को और तेजी से नुकसान होगा। एक तो कोरोना के कारण वैसे ही इकॉनमी पटरी से उतर गई थी, अब जब पटरी पर चढ़ने की बारी आयी तो किसान आंदोलन शुरू हो गया है.

गौरतलब है कि कृषि कानून को लेकर आंदोलनरत किसान संगठनों और केंद्र सरकार के बीच अबतक 6 दौर की वार्ता हो चुकी है लेकिन बेनतीजा रही है. केंद्र सरकार किसानों से कह रही है कि कानून में किसानों को जो आपत्ति हो बताएं उसमें संसोधन करने के लिए सरकार तैयार है, सरकार एमएसपी भी लिखित में देने को तैयार है. हालाँकि आंदोलनरत किसान कृषि कानून को रद्द करवाने की अपनी मांग को लेकर अड़े हुए हैं. केंद्र सरकार ने साफ़ कर दिया है कि कृषि कानून रद्द नहीं हो सकता है. संसोधन करना विकल्प है।