क्या वापस होगा कृषि कानून या होगा संसोधन? जाने केंद्र सरकार का क्या कहना है

पिछले लगभग 10 दिनों से कृषि कानूनों के विरोध में किसानों का विरोध प्रदर्शन जारी है, किसानों की मांग को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार सुबह मंत्रिमंडल के वरिष्ठ नेताओं की बैठक बुलाई. इस बैठक में गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और पीयूष गोयल शामिल हुए. ये बैठक किसानों और सरकार के बीच बातचीत से ठीक पहले बुलाई गई.

आंदोलन कर रहे किसानों का कहना है कि मोदी सरकार तत्काल तीनों नए कृषि कानून को रद्द करे. वहीँ केंद्र सरकार के रुख से स्पष्ट है कि कृषि कानून किसी भी कीमत पर रद्द नहीं हो सकता है, हाँ! संसोधन की गुंजाइस है।

माना जा रहा है कि सरकार ने गतिरोध खत्म करने के लिए उन प्रावधानों का संभावित हल तैयार कर लिया है, जिन पर किसानों को ऐतराज है. कहा जा रहा है कि सरकार किसानों को लिखित आश्वासन दे सकती है।

किसान आंदोलन को लेकर राजनीति भी तेज हो गई है, चिल्ला बॉर्डर पर किसानों का गजब तेवर देखने को मिला है. खाना, समान और समर्थन लेकर आये समाजवादी पार्टी के लोगों को किसानों ने वापस भेज दिया. समाजवादी पार्टी के लोगों ने अपनी गाड़ी पर लगे झंडे को पहले हटाया या कपड़े से ढक दिया. उसके बावजूद किसानों ने उनका कोई भी सामान वापस लेने से इनकार कर दिया।