मुनव्वर राणा ने अवॉर्ड लौटाने का किया था नाटक, अवॉर्ड के साथ मिली रकम आजतक नहीं लौटाई, पत्रकार का दावा

देश में एक बार फिर अवॉर्ड वापस करने की परम्परा शुरू हो गई है, कृषि कानून का समर्थन करते हुए पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और अकाली दल के नेता प्रकाश सिंह बादल ने अपना पद्म विभूषण अवॉर्ड लौटा दिया। इसके अलावा पंजाब के कई कई खिलाडियों ने अवॉर्ड लौटाने का ऐलान किया है, इसी बीच वरिष्ठ पत्रकार अशोक श्रीवास्तव ने ट्वीट करके दावा किया है कि मुनव्वर राणा ने भी अवॉर्ड वापस करने का नाटक किया था लेकिन अवॉर्ड के साथ मिली रकम आज तक नहीं लौटाई। वरिष्ठ पत्रकार का कहना है कि आरटीआई के जरिये ये जानकारी सामने आई है.

डीडी न्यूज़ में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार अशोक श्रीवास्तव ने अपने ट्वीट में लिखा, अब जबकि “रिटर्न्स ऑफ अवार्ड वापसी” हो रही है तो बता दूं कि झोले में भर कर ट्रॉफी टीवी चैनल स्टूडियो ले जाकर वापसी का नाटक करने वाले चचा मुनव्वर राणा ने आज तक अवार्ड के साथ मिली रकम वापस नहीं लौटाई। RTI के जवाब में यह पता चला। विरोध करना है तो शौक से करो खुल कर करो, नाटक न करो!

जानकारी के अनुसार, उर्दू शायर मुनव्वर राणा ने साल 2015 में अपना साहित्य अकादमी अवॉर्ड लौटा दिया था, एक टीवी चैनल के लाइव शो को दौरान उन्होंने पुरस्कार के रूप में मिली शील्ड वापस करने का ऐलान किया। मिली जानकारी के मुताबिक़, मुनव्वर राणा को शील्ड के साथ अवॉर्ड के रूप में एक लाख रूपये का चेक भी मिला थी लेकिन उसे वापस नहीं किया।

मुनव्वर राणा को 2014 में ‘शाहदाबा’ के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला था. दादरी में अखलाक, उससे पहले सीपीआई नेता गोविंद पनसारे और कलबुर्गी की हत्या के प्रतीकात्मक विरोध के तौर पर अवॉर्ड लौटाने का यह सिलसिला शुरू हुआ था।

अवॉर्ड वापसी को लेकर सोशल मीडिया पर भी बहस छिड़ गई है, लोगों का कहना है कि अवार्ड के साथ-साथ जो रकम मिलती है उसे तो वापस करना ही चाहिए साथ ही हर हर सरकारी भत्ते का त्याग कर देना चाहिए।