27 साल पहले जिस कानून की मांग कर रहे थे पिता महेंद्र टिकैत, आज उसी का विरोध कर रहे पुत्र राकेश टिकैत

केंद्र सरकार द्वारा बनाये गए कृषि कानून के विरोध में पंजाब, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा के कुछ किसान संगठन पिछले 18 दिनों से आंदोलन कर रहे हैं, पंजाब और हरियाणा के किसानों के साथ एक और नाम जो आंदोलन में मुखर तौर पर उभरा है वह है भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत का. भारतीय किसान यूनियन एक ऐसा किसान संगठन है जिसकी पहचान पूरे देश में है

भारतीय किसान यूनियन की पहचान देश के जाने-माने किसान नेता स्व. महेंद्र सिंह टिकैत से होती है, जिस कृषि कानून का आज राकेश टिकैत विरोध कर रहे हैं 27 साल पहले राकेश के पिता स्व. महेंद्र सिंह टिकैत ने इसी कानून को बनाये जानें की मांग की थी.

हिंदुस्तान अख़बार में छपी खबर के मुताबिक़, मोदी सरकार की कैबिनेट ने किसानों को अपनी उपज बेंचने के लिए एक देश, एक बाजार सहमति देते हुए जिस अध्यादेश को दी उसकी मांग 27 साल पहले चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत ने 1993 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव दिल्ली में मिलकर इस मांग को उठाया था. हालाँकि उस समय केंद्र सरकार ने इस मांग को तत्काल पूरा करने में असमर्थता जता दी थी.

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अब जब मोदी सरकार ने कानून बना दिया तो राकेश टिकैत उसी का विरोध कर रहे हैं, भारतीय किसान यूनियन के नेता रहे स्वर्गीय महेंद्र सिंह टिकैत के पुत्र राकेश टिकैत इस समय भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं, बड़े भाई नरेश टिकैत अध्यक्ष जरूर हैं लेकिन सारे फैसले राकेश ही लेते हैं.

राकेश टिकैत फिलहाल किसानों के उस प्रतिनिधि मंडल में शामिल हैं जो कृषि संशोधन बिल पर लगातार सरकार से बात कर रही है. बीती शाम अमित शाह से मुलाकात करने वाले किसानों में भी राकेश टिकैत शामिल थे और सभी पिछले पांच दौर की वार्ताओं में भारतीय किसान यूनियन का प्रतिनिधित्व राकेश टिकैत ही कर रहे हैं।