आढ़ती-दलाल रो रहे हैं, असली किसान कर रहे भाजपा मोदी के गुणगान, पढ़ें क्यों

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नई दिल्ली: किसानों के दो ग्रुप बन गए हैं, मोदी-भाजपा समर्थक किसान और कृषि कानून विरोधी किसान। कृषि कानून का अधिकतर विरोधी मंडियाँ में काम कर रहे आढ़ती और दलाल कर रहे हैं क्योंकि वर्तमान में जब किसान मंडी में फसल बेचने आता है तो दलाल लोग किसान को ब्लैकमेल और मजबूर करके सस्ते में अनाज खरीद लेते हैं और मोटा कमीशन खाकर उसे उद्योगपतियों को बेच देते हैं।

कृषि कानून आने के बाद प्राइवेट गोदाम खोले जाएंगे जहाँ पर किसान उचित कीमत में बिना कमीशन दिए अपना अनाज और फल, सब्जी आदि बेच सकेंगे और अपना मुनाफ़ा बढ़ा सकेंगे।

असली किसान दलालों के खेल को समझ रहे हैं इसलिए मोदी सरकार और भाजपा पार्टी का समर्थन कर रहे हैं, असली किसान जब मंडियों में फसल बेचने जाते हैं तो उन्हें बहुत परेशानी होती है, कई घंटे इन्तजार करना पड़ता है, जब इन्तजार की हद पार हो जाती है तो किसानों को मजबूरी वश दलालों से संपर्क करना पड़ता है और उन्हें कमीशन देकर अपनी उपज बेचनी पड़ती है, अगर किसान 20 क्विंटल अनाज लाता है तो उसे सिर्फ 15 क्विंटल अनाज के पैसे मिलते हैं और बाकी अनाज बिचौलियों, दलालों और कमीशनखोरों के हिस्से में जाता है।

इस आंदोलन में किसान नहीं बल्कि मोटा कमीशन खाने वाले दलालों और आढ़तियों ने किसानों का भेष धारण करके धरने में शामिल हो गए हैं और इसे किसान आंदोलन साबित करने पर तुले हैं जबकि ये आढ़ती और दलाल आंदोलन है।

मोदी सरकार किसानों को 6000 रुपये हर साल किसान सम्मान निधि दे रही है, गरीब किसानों के लिए 6000 रुपये अच्छी राशि है इसलिए किसान कृषि कानून का विरोध नहीं कर रहे हैं।