किसान आंदोलन के बीच हिंसा भड़काने की साजिश रच रहे वामपंथी, सुरक्षा एजेंसियों का सनसनीखेज खुलासा!

प्रतीकात्मक चित्र - साभार सोशल मीडिया

कृषि कानून के विरुद्ध पिछले लगभग 15 दिनों से किसान दिल्ली में आंदोलनरत हैं, किसानों के नाम पर अब इस आंदोलन को कुछ लोगों ने साजिश के तहत राजनीति का अखाड़ा बना दिया है, और अपना एजेंडा चला रहे हैं, इसी आंदोलन में ( 10 दिसंबर, 2020 ) को देशद्रोह के आरोप में जेल में बंद उमर खालिद, शरजील इमाम जैसे गद्दारों के रिहाई की मांग की गई। इसके बाद लोगों ने तरह-तरह के सवाल उठाने शुरू कर दिए। इन सब के बीच देश की सुरक्षा एजेंसियों ने सनसनीखेज खुलासा किया है।

खुफिया एजेंसियों के सूत्रों के हवाले से समाचार चैनल टीवी-9 भारतवर्ष ने दावा किया है कि किसान आंदोलन के बीच हिंसा भड़काने की साजिश रची जा रही है, टीवी-9 के मुताबिक़, हिंसा की खौफनाक साजिश रचने वाले अल्ट्रा लेफ्ट यानि वामंपंथी नेता हैं।

यूँ तो ये आंदोलन शुरू से ही सवालों से के घेरे में रहा है लेकिन अब जैसे-जैसे बढ़ रहा है वैसे-वैसे परत-दर रत खुलती जा रही है, पहले इस आंदोलन में खालिस्तान के पोस्टर लहराए गए तो अब शरजील इमाम जैसे गद्दारों की रिहाई की मांग की जा रही है। इससे आप इनकी मंशा समझ सकते हैं। जानकारों का कहना है कि किसान आंदोलन को वामपंथियों ने हाईजैक कर लिया है। किसानों को मोहरा बनाकर वामपंथी अपना एजेंडा चला रहे हैं।

गौरतलब है कि कृषि कानून को लेकर आंदोलनरत किसान संगठनों और केंद्र सरकार के बीच अबतक पांच दौर की वार्ता हो चुकी है लेकिन बेनतीजा रही है. केंद्र सरकार किसानों से कह रही है कि कानून में किसानों को जो आपत्ति हो बताएं उसमें संसोधन करने के लिए सरकार तैयार है, सरकार एमएसपी भी लिखित में देने को तैयार है. हालाँकि आंदोलनरत किसान कृषि कानून को रद्द करवाने की अपनी मांग को लेकर अड़े हुए हैं. केंद्र सरकार ने साफ़ कर दिया है कि कृषि कानून रद्द नहीं हो सकता है. संसोधन करना विकल्प है।