शुरू हुआ सड़कें खोलने का सिलसिला, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह से मीटिंग के बाद खुला चिल्ला बॉर्डर

कृषि कानून के विरोध में पंजाब, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा के कुछ किसान संगठन पिछले आंदोलन कर रहे हैं, आंदोलनरत किसान पिछले 18 दिनों से दिल्ली की सीमा पर जमे हुए हैं, आंदोलनकारी किसानों ने दिल्ली के लगभग सभी प्रमुख एंट्री पॉइंट को बंद कर रखा है लेकिन अब सड़कें खुलने का सिलसिला शुरू हो चुका है, इसकी शुरुवात हुई नोएडा को दिल्ली से जोड़ने वाले चिल्ला बॉर्डर से. चिल्ला बॉर्डर अब खुल गया है, किसान आंदोलनकारी हट गए हैं सड़कों से.

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह से आंदोलनकारी किसानों ने मीटिंग की उसके बाद चिल्ला बॉर्डर को खोल दिया, माना जा रहा है कि रक्षामंत्री के आश्वाशन से किसान सहमत हैं तभी सड़क खाली कर दिए.

राजनितिक जानकारों का कहना है कि किसान आंदोलन से एक बड़ा धड़ा अलग होने की कगार पर है, राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल होने से इनकार किया कर दिया है.

गौरतलब है कि कृषि कानून के विरोध में पिछले 18 दिनों से दिल्ली में किसानों का आंदोलन जारी है, किसान संगठनों और केंद्र सरकार के बीच अबतक पांच दौर की बातचीत हो चुकी है लेकिन अबतक कोई हल नहीं निकल सका है, प्रदर्शनकारी अब तो आंदोलन की आड़ में शरजील ईमाम, उमर खालिद जैसे गद्दारों की मांग भी करने लगे हैं.

किसान आंदोलन को लेकर केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि अब यह आंदोलन ज्यादातर लेफ्टिस्टों ( वामपंथियों ) और माओवादियों के हाथ में चला गया है। ये वामपंथी दल अपना एजेंडा चलाना चाहते हैं। गोयल ने किसानों से अपील की है कि वे उनके बहकावे में ना आकर सरकार से बातचीत करें। किसानों के लिए सरकार के दरवाजे खुले हैं और सरकार हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है।गोयल ने साफ कहा कि इस बिल से देश के सभी किसानों को बेहद फायदा पहुंचने वाला है। कुछ थोड़े से लोगों के लिए पूरे देश के किसानों के फायदे का नुकसान नहीं किया जा सकता।