किसी भी हद तक जा सकते हैं खालिस्तानी और चरमपंथी, किसान रहें अलर्ट, एजेंसियों को मिली चौंकाने वाली जानकारी

कृषि कानून के विरुद्ध पिछले लगभग 19 दिनों से किसान दिल्ली में आंदोलनरत हैं, किसानों के नाम पर अब इस आंदोलन को कुछ लोगों ने साजिश के तहत राजनीति का अखाड़ा बना दिया है, और अपना एजेंडा चला रहे हैं, इसी आंदोलन में ( 10 दिसंबर, 2020 ) को देशद्रोह के आरोप में जेल में बंद उमर खालिद, शरजील इमाम जैसे गद्दारों के रिहाई की मांग की गई। इसके बाद लोगों ने तरह-तरह के सवाल उठाने शुरू कर दिए। इन सब के बीच देश की सुरक्षा एजेंसियों को चौंकाने वाली जानकारी मिली है.

वरिष्ठ पत्रकार अभिषेक उपाध्याय ने ट्वीट कर बताया है कि एजेंसियों को जानकारी मिली है खालिस्तानी और चरमपंथी किसी भी हद तक जा सकते हैं, ऐसे में जमावड़े में शामिल किसानों को अलर्ट रहने की ज़रुरत है। पत्रकार उपाध्याय ने अपने ट्वीट में लिखा, एजेंसियों को मिली जानकारी के मुताबिक किसानों के नाम पर किया गया जमावड़ा बेहद ‘unsafe’ होता जा रहा है। खालिस्तानी और चरम वामपंथी अपनी frustation निकालने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। जमावड़े में शामिल किसानों को।

इससे पहले जानकारी मिली थी कि किसान आंदोलन के बीच हिंसा भड़काने की साजिश रची जा रही है, टीवी-9 के मुताबिक़, हिंसा की खौफनाक साजिश रचने वाले अल्ट्रा लेफ्ट यानि वामंपंथी नेता हैं।

गौरतलब है कि कृषि कानून को लेकर आंदोलनरत किसान संगठनों और केंद्र सरकार के बीच अबतक पांच दौर की वार्ता हो चुकी है लेकिन बेनतीजा रही है. केंद्र सरकार किसानों से कह रही है कि कानून में किसानों को जो आपत्ति हो बताएं उसमें संसोधन करने के लिए सरकार तैयार है, सरकार एमएसपी भी लिखित में देने को तैयार है. हालाँकि आंदोलनरत किसान कृषि कानून को रद्द करवाने की अपनी मांग को लेकर अड़े हुए हैं. केंद्र सरकार ने साफ़ कर दिया है कि कृषि कानून रद्द नहीं हो सकता है. संसोधन करना विकल्प है।