‘भारतीय किसान संघ’ ने किया भारत बंद का बहिष्कार, देश तोड़ो ताक़तों के साथ नही दे सकते

पिछले लगभग 11 दिनों से दिल्ली में कृषि कानून के विरोध में पंजाब के किसान आंदोलन कर रहे हैं, किसान संगठन के प्रतिनिधियों और सरकार के बीच 5 राउंड की बातचीत हो चुकी है लेकिन अभी तक कोई हल नहीं निकला है, अब छठे राउंड की बातचीत 9 दिसंबर को होगी, उससे पहले किसानों ने 8 दिसंबर, 2020 को भारत बंद बुलाया है, किसानों द्वारा बुलाये गए भारत बंद को कांग्रेस, सपा और आम आदमी पार्टी समेत कई पार्टियां समर्थन दे रही हैं.

किसानों द्वारा बुलाये गए ‘भारत बंद’ का किसानों के सबसे बड़े संगठन ‘भारतीय किसान संघ’ ने बहिष्कार किया है, किसान संघ ने एक बयान जारी कर इस बात की जानकारी दी. भारतीय किसान संघ द्वारा जारी बयान के मुताबिक, कृषि कानून में संशोधन के साथ है, देश तोड़ो ताक़तों के साथ नही। जबकि राजनीति से प्रेरित अन्य किसानों को कृषि कानून को रद्द करने से कम कुछ भी मंजूर नहीं है.

“भारतीय किसान संघ” के मुताबिक़, अभी तक किसान आंदोलन अनुशाषित तरीके से चला है, परन्तु पिछले कुछ दिनों के घटनाक्रम को ध्यान में रखते हुए यह कहना उचित नहीं होगा कि विदेशी ताकतें, राष्ट्रद्रोही तत्व, एवं कुछ राजनैतिक दलों का प्रयास किसान आंदोलन को अराजकता की ओर मोड़ देने में प्रयासरत है. अपनी बात को मजबूती देने के लिए किसान संघ ने 2017 में हुई मंदसौर की एक घटना का उदाहरण भी दिया है. जिसमें 6 किसानों की गोली लगने से मौत हो गई थी, 32 गाड़ियां जलकर ख़ाक हो गई थी, व् कुछ दुकाने और घर भी जल गए थे। पढ़िए पूरा बयान

आपको बता दें कि भारतीय किसान संघ आरएसएस का संगठन है, किसान संघ द्वारा भारत बंद का बहिष्कार करने से सबसे ज्यादा चुभन वामपंथियों को हुई है, क्योंकि वामपंथी पहले यह कहते घूमते थे कि किसान संघ भी कृषि कानून का विरोध कर रहा है, अब सरकार को ये कानून रद्द करना चाहिए। हकीकत यह है कि किसान संघ की मांग है कि कानून में संसोधन हो, जिसपर केंद्र सरकार राजी है।