किसान आंदोलन मामले में सुप्रीम कोर्ट का आदेश आया सामने, 8 किसान संगठनों को बनाया गया है पार्टी!

कृषि कानून के विरोध में पिछले 21 दिनों से किसान संगठन दिल्ली बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे हैं, अबतक कोई रास्ता निकलता नहीं दिख रहा है। न तो सरकार कानून वापस लेने के जरा भी संकेत दे रही है न किसान धरना छोड़ने के, इन सबके बीच सुप्रीम कोर्ट में किसान आंदोलन को लेकर याचिका भी दायर हो गई थी, जिसपर सुप्रीम कोर्ट ने आज सुनवाई की.

कानून के छात्र ऋषभ शर्मा ने किसान आंदोलन को लेकर ये याचिका दी थी। इस याचिका में दिल्ली बॉर्डर से किसानों को हटाने की मांग है। साथ ही कहा गया है कि लोगों के इकट्ठा होने से कोरोना के संक्रमण का खतरा बढ़ेगा। याचिका में आगे कहा गया कि लोगों को हटाना आवश्यक है, क्योंकि इससे सड़कें ब्लॉक हो रही हैं व इमरजेंसी और मेडिकल सर्विस भी बाधित हो रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए रोड जामकर बैठे किसान संगठनों को नोटिस जारी किया है, गतिरोध तोड़ने के लिए सर्वोच्च अदालत ने समिति भी बना दी है, किसान संगठनों से कहा है कि कोर्ट में अपनी बात रखें किसान….दिल्ली बार्डर सील करने के मामले में भी नोटिस भेजा गया है. सुप्रीम कोर्ट जो कमेटी बनाएगी उसमें आंदोलनकारी संगठनों के साथ, सरकार और देश के बाकी किसान संगठनों के भी लोग होंगे।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश अब सामने आ गया है, आठ किसान संगठनों को पार्टी बनाया गया है, इन संगठनों को सुनवाई के दौरान अपनी बात रखने का मौक़ा मिलेगा। सुनवाई गुरूवार ( 17 दिसंबर, 2020 ) को होगी।

ये किसान संगठन बनाये गए हैं पार्टी।

  1. भारतीय किसान यूनियन (टिकैत).
  2. बीकेयू सिधुपुर।
  3. बीकेयू राजेवाल।
  4. बीकेयू लाखोवाल।
  5. जम्हूरी किसान सभा.
  6. बीकेयू दकौंडा।
  7. बीकेयू दोआबा।
  8. कुल हिंद किसान फेडरेशन