मोदी का साथ छोड़ते ही बर्बाद हुए उपेंद्र कुशवाहा, बिहार में सभी सीटों पर हारे इनके प्रत्याशी

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कुछ नेताओं को अपनी हैसियत का अंदाजा नहीं होता है, फिर भी वो अपनी छोटी कुर्सी छोड़कर बड़ी कुर्सी पर बैठना चाहते हैं, लेकिन होता क्या है कि उनको बड़ी कुर्सी भी नहीं मिलती और छोटी वाली से भी हाथ धोना पड़ता है, यही हाल उपेंद्र कुशवाहा का हुआ है, उपेंद्र कुशवाहा कभी केंद्र में मंत्री हुआ करते थे उनकी पार्टी के दो-तीन सांसद और 4-6 विधायक हुआ करते थे. लेकिन अब एक भी नहीं हैं.

उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक समता पार्टी पहले एनडीए का घटक दल थी, इसके चलतन कुशवाहा ने 2014 लोकसभा चुनाव में कुछ सीटें जीती थी और मोदी सरकार में मंत्री बन गए थे. 2019 में उपेंद्र कुशवाहा प्रधानमंत्री बनने का सपना देखने लगे. लिहाजा वो एनडीए से अलग हो गए और महागठबंधन में चले गए. उपेंद्र कुशवाहा ने लोकसभा में कई सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे खुद भी चुनाव लड़े थे लेकिन सभी सीटों पर उनकी जमानत जब्त हो गई.

उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी का हार सिलसिला थमा नहीं। बिहार विधानसभा चुनाव कुशवाहा ने मायावती की पार्टी के साथ मिलकर लड़ा. कुशवाहा ने तकरीबन 100 सीटों से ज्यादा पर प्रत्याशी उतारे थे लेकिन एक भी सीट नहीं जीत पाए. इस तरह से उपेंद्र कुशवाहा जैसे ही एनडीए से अलग हुए उनके बुरे दिन शुरू हो गए।