डिप्टी CM की कुर्सी छीने जानें से नाराज हुए सुशील मोदी, केंद्रीय नेतृत्व के समक्ष दिखाई अपनी नाराजगी

बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की जीत के बाद सोमवार ( 16 नवंबर, 2020 ) को सरकार का गठन भी हो गया, जनता दल यूनाइटेड ( जदयू ) प्रमुख सीएम नीतीश कुमार ने समेत 14 विधायकों ने मंत्रिपद की शपथ ली. खास बात यह रही कि डिप्टी सीएम सुशील मोदी की कुर्सी इस बार छीन ली गई. तारकिशोर प्रसाद और रेणु देवी बिहार की नई डिप्टी सीएम बनीं।

डिप्टी सीएम की कुर्सी छीने जानें से सुशील मोदी काफी नाराज हैं, 15 साल तक डिप्टी सीएम रहे सुशील मोदी कुर्सी की मोहमाया नहीं छोड़ पा रहे हैं, सुशील मोदी की नाराजगी का आलम यह है कि नीतीश कुमार के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए पटना पहुंचे केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के स्वागत के लिए सुशील मोदी बीजेपी दफ्तर नहीं पहुंचे।

हालांकि वह एयरपोर्ट पर शाह की अगवानी करने पहुंचे थे। चर्चा है कि सुशील मोदी ने इस कदम के जरिए केंद्रीय नेतृत्व के समक्ष अपनी नाराजगी दिखाई है। सुशील मोदी नई सरकार के गठन की पूरी प्रक्रिया में रविवार को कहीं नहीं दिखे। हालांकि पार्टी के नेताओं का कहना है कि नाराजगी कहीं कही कोई बात नहीं है।

आपको बताए दें कि नीतीश कुमार ने 7वीं बार बिहार के सीएम पद की शपथ ली, सुशील मोदी भी 15 सालों तक डिप्टी सीएम रहे, नीतीश कुमार की चापलूसी करने के अलावा उन्होंने कोई बहुत बढ़िया काम नहीं किया। यहाँ तक की सुशील मोदी के नाम पर भाजपा एक सीट भी नहीं जीत सकती। जानकारों का मानना ही कि इन्हीं सब वजहों से बीजेपी नेतृत्व ने सुशील मोदी की जगह दूसरे को मौका देना उचित समझा।

जब सुशील मोदी को भनक लगी कि उनसे डिप्टी सीएम की कुर्सी छीनी जा रही है तब उन्होंने ट्वीट में लिखा, भाजपा एवं संघ परिवार ने मुझे ४० वर्षों के राजनीतिक जीवन में इतना दिया की शायद किसी दूसरे को नहीं मिला होगा।आगे भी जो ज़िम्मेवारी मिलेगी उसका निर्वहन करूँगा।कार्यकर्ता का पद तो कोई छीन नहीं सकता।