सुप्रीम कोर्ट नहीं दी कथित पत्रकार व् PFI मेंबर सिद्दीक कप्पन को राहत, जेल में ही रहेगा कप्पन

सुप्रीम कोर्ट ने केरल के कथित पत्रकार व् पीएफआई सदस्य सिद्दीक कप्पन को राहत नहीं दी, कॉन्ग्रेस नेता और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल द्वारा दायर की गई बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को स्थगित कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामलें में यूपी सरकार को नोटिस जारी किया है, अगली सुनवाई 20 नवंबर, 2020 ( शुक्रवार ) को होगी इस याचिका में केरल के कथित पत्रकार सिद्दीक कप्पन की रिहाई की माँग की गई थी।

बता दें कि सिद्दीक कप्पन, उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए चार पीएफआई सदस्यों में से एक है। ये लोग यूपी में हाथरस मामले को लेकर जाति आधारित अशांति और सांप्रदायिक तनाव पैदा करने की योजना बनाई थी।

भारत के मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली बेंच ने याचिकाकर्ता केरल यूनियन ऑफ़ वर्किंग जर्नलिस्ट्स की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल की दलीलें सुनीं और इस मामले में नोटिस जारी किया, इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने कपिल सिब्बल को इस मामलें को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट जानें की सलाह दी थी।

उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश के हाथरस में हुई घटना की आड़ में मथुरा से गिरफ्तार हुए दंगे की साजिश रचने वाले 4 आरोपितों के खिलाफ बुधवार (अक्टूबर 06, 2020) को मथुरा में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) और राजद्रोह के तहत केस दर्ज किया गया, जिनमें से एक केरल के कथित पत्रकार सिद्दीक कप्पन भी हैं।

दर्ज FIR में बताया गया कि अतीकुर्रहमान, आलम, केरल के सिद्दीक कप्पन (जो कि कथित तौर पर पत्रकार है) और मसूद अहमद के पास गिरफ्तारी के दौरान 6 स्मार्टफोन, एक लैपटॉप व ‘जस्टिस फॉर हाथरस’ नाम के पैम्फ़्लिट पाए गए थे और ये लोग शांति भंग करने के लिए हाथरस जा रहे थे। ये लोग हाथरस पहुँच पाते उससे पहले यूपी पुलिस ने इन्हें गिरफ्तार कर लिया और जेल में डाल दिया। सिद्दीक कप्पन की गिरफ़्तारी से वामपंथी बिलबिलाये हुए हैं।