अर्नब केस में सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट को लगाई फटकार

हाल ही में मुंबई पुलिस ने रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी को दो साल पुराने बंद पड़े केस में गिरफ्तार कर लिया था, वरिष्ठ पत्रकार अर्नब गोस्वामी सात दिन तलोजा जेल में रहे थे, बॉम्बे हाईकोर्ट ने जमानत याचिका ख़ारिज कर दी थी, 11 नवंबर, 2020 को सुप्रीम कोर्ट ने अर्नब को जमानत दे दी.

सर्वोच्च अदालत ने पत्रकार अर्नब गोस्वामी और दो अन्य आरोपियों को अंतरिम जमानत प्रदान करने के संबंध में आज यानी शुक्रवार को विस्तृत कारण बताया। सुप्रीम कोर्ट ने अर्नब गोस्वामी को अंतरिम जमानत प्रदान करने के संबंध में कारण बताते हुए कहा महाराष्ट्र पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर का प्रथम दृष्टया मूल्यांकन उनके खिलाफ आरोप स्थापित नहीं करता है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पत्रकार अर्नब गोस्वामी को दो साल पुराने आत्महत्या के लिए उकसाने के एक मामले में मिली अंतरिम जमानत, बंबई उच्च न्यायालय के याचिका का निपटारा करने तक जारी रहेगी। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि उच्च न्यायालय, निचली अदालत को राज्य द्वारा आपराधिक कानून के दुरुपयोग के प्रति सतर्क रहना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उच्चतम न्यायालय, उच्च न्यायालय, जिला न्यायपालिका को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आपराधिक कानून नागरिकों को चुनिंदा तरीके से उत्पीड़ित करने का हथियार ना बनें।

गौरतलब है सर्वोच्च अदालत ने वरिष्ठ पत्रकार अर्नब गोस्वामी को 11 नवंबर को जमानत दे दी थी। जस्टिस धनञ्जय यशवंत उर्फ़ डी वाई चन्रचूड़ ने कहा था कि अगर निजी स्वतंत्रता का हनन हुआ तो यह न्याय पर आघात होगा।

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