गिरफ्तार होनें से अर्नब गोस्वामी के चैनल को हुआ फायदा, और बढ़े रिपब्लिक के दर्शक!

रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी को मुंबई पुलिस ने बुधवार ( 4 नवम्बर, 2020 ) को सुबह लगभग साढ़े 6 बजे उनके घर से गिरफ्तार कर लिया। आत्महत्या के लिए उकसाने के दो साल पुराने बंद केस में अर्नब की गिरफ़्तारी हुई। जिस बर्बरतापूर्व तरीके से मुंबई पुलिस ने अर्नब को अरेस्ट किया उसका देशभर में विरोध हो रहा है। हालाँकि अर्नब की गिरफ़्तारी से उनके चैनल को भी फायदा हुआ है।

जबसे अर्नब गोस्वामी गिरफ्तार हुए तबसे देशभर में अर्नब की ही चर्चा चल रही है, हर किसी के जुबान पे अर्नब है, पूरी सोशल मीडिया अर्नब से भरी पड़ी है, अर्नब के बारे में लेटेस्ट अपडेट के लिए लोग रिपब्लिक को देख रहे हैं।

ट्विटर पर अर्नब गोस्वामी के समर्थन में ट्रेंड चल रहा है, हालाँकि यही BARC टीआरपी नहीं जारी कर रही है लेकिन यु-ट्यूब पर देखने के बाद पता चलता है कि अर्नब की गिरफ़्तारी के बाद रिपब्लिक देखने वालों की संख्या बढ़ी है।

आजतक, एबीपी न्यूज़, जी न्यूज़ जैसे चैनलों के यु-ट्यूब 20 से 40 मिलियन तब सब्सक्राइबर हैं, जबकि रिपब्लिक भारत के सिर्फ साढ़े 4 मिलियन सब्स्क्राइबर है, इसके बादवजूद आजतक, एबीपी न्यूज़, जी न्यूज़ के मुकाबले रिपब्लिक को दो-तीन गुना ज्यादा देखा जा रहा है।

अर्नब की गिरफ़्तारी के बाद महाराष्ट्र मानवाधिकार आयोग ने एसपी रायगढ़ को नोटिस भेजकर पेश होने को कहा था, बताते चलें की अर्नब को गिरफ्तार करने के लिए मुंबई पुलिस की रायगढ़ पुलिस गई थी, जिस तरह मुंबई पुलिस ने अर्नब के साथ आतंकी जैसा सलूक किया उससे मानवाधिकार आयोग नाराज है, इसे मानवाधिकारों का उल्लंघन माना है. महाराष्ट्र मानवाधिकार आयोग ने रायगढ़ के पुलिस अधीक्षक को नोटिस भेजकर 6 नवम्बर, 2020 को सुबह 11 बजे पेश होनें का आदेश दिया है।

रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के संपादक को गिरफ्तार करने के बाद मुंबई पुलिस उन्हें अलीबाग कोर्ट में पेश करने ले गई. पुलिस ने अदालत से अर्नब की रिमांड मांगी लेकिन कोर्ट ने पुलिस की मांग को खारिज करते हुए अर्नब को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।