तलोजा जेल से बाहर आये अर्नब गोस्वामी तो गुस्से से लाल हुए राहुल गांधी, ट्वीट कर कह दी बड़ी बात

4 नवंबर, 2020 को एक बंद हुए पुराने केस में मुंबई पुलिस ने रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के एडिटर इन-चीफ अर्नब गोस्वामी को गिरफ्तार कर लिया था, हैरान करने वाली बात यह है कि अर्नब को गिरफ्तार करने दर्जनों पुलिसकर्मीं गए थे वो भी एके-47 जैसे खतरनाक हथियार लेकर। यही नहीं अर्नब को तलोजा जेल भेजा गया जहाँ खूंखार अपराधी, आतंकी और आतंकी दाऊद के गुर्गे भरे पड़े हैं। सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद अर्नब गोस्वामी 11 नवंबर, 2020 को तलोजा जेल से बाहर आ गए।

अर्नब गोस्वामी के जेल से बाहर आने के बाद एक तरफ देश में जहां ख़ुशी की लहर है तो वहीँ एक खेमा गम में डूबा हुआ है, अर्नब के जेल से बाहर आने के बाद राहुल गांधी भी गुस्से से लाल हो गए, इसका अंदाजा उनके ट्वीट से लगाया जा सकता है। राहुल गांधी ने बिना अर्नब का नाम लिए ट्वीट करके उनपर निशांना साधा।

बात दरअसल यह है कि जब महाराष्ट्र सरकार ( शिवसेना-कांग्रेस-एनसीपी ) के इशारे पर मुंबई पुलिस ने अर्नब को गिरफ्तार किया तो भारतीय जनता पार्टी ( भाजापा ) ने अर्नब का खुलकर समर्थन किया, अर्नब की गिरफ़्तारी को लोकतंत्र के लिए खतरा बताया। साथ ही यह भी कहा कि आपातकाल की यादें ताजा हो गई।

भाजपा द्वारा अर्नब का समर्थन किये जानें से राहुल गांधी बहुत नाराज दिखे, राहुल गांधी ने अपने एक ट्वीट में लिखा, यूपी के पत्रकार विनय तिवारी को भाजपा के गुंडों ने बेरहमी से पीटा है। अधिकारों की बात चली है तो सोचा पूछ लें कि कुछ चुनिंदा पत्रकारों के लिए ही अधिकार याद आएँगे या विनय तिवारी जैसे पीड़ितों के लिए भी?

अर्नब के जेल से बाहर आने के बाद राहुल गांधी ने बिना अर्नब का नाम लिए अपने ट्वीट में लिखा, भाजपा नेताओं के भ्रष्टाचार का पर्दाफ़ाश करने वाले असम के पत्रकार पराग भुइयां की संदिग्ध परिस्थिति में हत्या हो गयी। उनके परिवार को मेरी संवेदनाएँ।असम, मध्य प्रदेश या यूपी, भाजपा शासित राज्यों में सच्ची पत्रकारिता का गला घोटा जा रहा है और तमाशा करने वालों को सुरक्षा मिल रही है।

राहुल गांधी ने अपने ट्वीट में अर्नब का नाम भले ही न लिखा हो, लेकिन उनके ट्वीट से साफ़ पता चलता है कि उनका ये ट्वीट उन्हीं के विरोध में है।