आखिर पंजाब के किसान ही क्यों कर रहे हैं किसान आंदोलन? समझिये साजिश की इनसाइड स्टोरी

केंद्र सरकार द्वारा बनाये गए कृषि कानून का विरोध करने के लिए पंजाब के किसानों ने दिल्ली कूच किया है, ये किसान बाकायदा 4-6 महीनें का राशन-अपनी लेकर आंदोलन करने के लिए निकले हैं. कुछ लोग इन किसानों का समर्थन कर रहे हैं तो कुछ इनका विरोध कर रहा हैं, कांग्रेस पार्टी खुलकर इन किसानों का समर्थन कर रही है वहीँ भाजपा का कहना है कि किसानों को कृषि कानून से कोई दिक्कत है तो हम किसी भी वक्त बातचीत के लिए तैयार हैं।

विचारणीय विषय यह है कि कृषि कानून का विरोध करने के लिए सिर्फ पंजाब के किसान ही निकले हैं, ऐसे में सवाल यह उठता है कि किसान क्या पंजाब में ही रहते हैं या सिर्फ पंजाब में ही किसानी होती है, अगर कृषि कानून वाकई किसान विरोधी होता तो देशभर के किसान इसका विरोध करने के लिए सड़कों पर उतरते।

विशेषज्ञों का कहना है कि किसान आंदोलन तो नाम का रह गया है, असलियत ये है कि खालिस्तानियों ने इसे हाईजैक कर लिया है और अपना एजेंडा चलानें की कोशिश कर रहे हैं, इसके लिए बाकायदा फंडिंग भी हुई है. इसलिए सिर्फ पंजाब के कथित किसान ही सक्रीय दिखाई दे रहे हैं. किसान आंदोलन में खालिस्तानियों के शामिल होनें के कई सबूत हैं।

सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें और वीडियो वायरल हो रहे हैं जिसमें आंदोलन कर रहे कथित किसान कहीं खालिस्तान जिंदाबाद के नारे लगा रहे हैं तो कहीं भिंडरावाले का पोस्टर लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं. भिंडरवाला एक खालिस्तानी आतंकवादी था. 1984 में अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर में चले ऑपरेशन ब्लू स्टार में भिंडरावाले को मार गिराया गया था।

ऐसे में ये साफ़ हो जाता है कि ये किसान आंदोलन साजिश के तहत हो रहा है, लोगों ने आशंका यह भी जताई है कि इस आंदोलन के बहाने दिल्ली में दंगा भी हो सकता है, खालिस्तानी संगठनों के साथ-साथ ‘यूनाइटेड अगेंस्ट हेट (UAH)’ संगठन के भी इसमें शामिल होने और इसे समर्थन देने के आरोप हैं। ये वही इस्लामी संगठन है, जिस पर दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी दंगों में शामिल होने के भी आरोप हैं। UAH ने किसान आंदोलनकारियों को भोजन व अन्य चीजें पहुँचाने का जिम्मा उठा रखा है।

UAH की पूरी कोशिश है कि दिल्ली पहुँचे ‘किसान’ आंदोलनकारी ज्यादा से ज्यादा दिनों तक यहाँ रहें और लंबे समय तक हंगामा करें। इसलिए, उसने दिल्ली की 25 मस्जिदों के साथ मिल कर आंदोलनकारियों को न सिर्फ खाने-पीने की चीजें, बल्कि रहने के लिए जगह भी मुहैया कराने का जिम्मा उठा लिया है।

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