चीन में चरम पर तानाशाही: चीनी सरकार की आलोचना करने पर महिला पत्रकार को 5 साल की जेल

चीन में तानाशाही पूरे चरम पर है, जो भी चीन की शी जिनपिंग सरकार की खिलाफत करता है उसे उठाकर जेल में ठूंस दिया जाता है, चाहे पत्रकार ही क्यों हो. कोरोना पर चीन सरकार के खिलाफ रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों पर चीन ने ज्यादा जुल्म ढहाया। जिसने भी कोरोना पर चीन सरकार की पोल खोलने की कोशिश की उसको जेल में ठूंस दिया गया. उल्लेखनीय है कि चीन पर लगातार आरोप लग रहे हैं कि वह कोरोना वायरस को लेकर सच छिपा रहा है और उसने दुनिया को गुमराह किया है।

ऑपइण्डिया के मुताबिक, एक नए दस्तावेज में खुलासा हुआ है कि वुहान में कोरोना वायरस पर रिपोर्टिंग करने वाली एक महिला पत्रकार को चीन ने पाँच साल के लिए जेल भेज दिया है।

37 वर्षीय चीनी पत्रकार झांग झान को बीते मई महीने में गिरफ्तार किया गया था। वह तभी से जेल में हैं। उन पर आरोप हैं कि उन्होंने झगड़ा करने की कोशिश की और प्रशासन के लिए मुश्किलें खड़ी कीं। चीन हमेशा सामाजिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ इन्हीं आरोपों का इस्तेमाल करता रहा है और इससे संबंधित धाराओं में उन्हें जेल भेजता रहा है।

चीनी मानवाधिकार रक्षकों के अनुसार, वह 14 मई को लापता हो गई और एक दिन बाद पता चला कि उसे शंघाई में पुलिस ने हिरासत में लिया था। उन्हें 19 जून को शंघाई में औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया था। सोमवार (नवंबर 17, 2020) को जारी अभियोग पत्र में कहा गया है कि झांग झान ने टेक्स्ट वीडियो और अन्य मीडिया जैसे वीचैट, ट्विटर और यूट्यूब के माध्यम से गलत जानकारी फैलाई थी। उन पर ये भी आरोप है कि उन्होंने विदेशी मीडिया को इंटरव्यू दिया और वुहान की खबरें लीक कीं। यही सब आरोप लगाकर पत्रकार को 5 साल के लिए जेल में ठूंस दिया गया। चीनी सरकार की इस तानाशाही के बाद कोई भी पत्रकार चीन सरकार के खिलाफ लिखने की हिम्मत नहीं कर पायेगा।