मोहल्ला क्लिनिक के बजाय केजरीवाल ने बनाये होते अस्पताल तो दिल्ली की जनता को न होती इतनी परेशानी

दिल्ली में कोरोना वायरस का प्रकोप जारी है। दिल्ली में दिन-प्रतिदिन हालात बहुत भयावह होते चले जा रहे हैं। दिल्ली की लचर स्वास्थ्य सुविधाएं उजागर हो रही हैं, मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने मोहल्ला क्लिनिक बनानें में अरबों रूपये फूंक दिए, मोहल्ला क्लिनिक के बजाय अस्पताल बनाये होते तो आज दिल्ली की जनता को परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल मोहल्ला क्लिनिक की तारीफ करते थकते नहीं लेकिन कोरोना संकट के समय में ये मोहल्ला क्लिनिक किसी के काम नहीं आ रहा है, दिल्ली की जनता को मजधार में छोड़कर मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल कोरोना के आगे घुटने टेक चुके हैं. दिल्लीवासियों की मदद करने के लिए अब केंद्र सरकार आगे आई है।

दिल्ली में बढ़ते कोविड-19 के मामलों और मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर की समीक्षा करने के लिए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने हाल ही में एक उच्च स्तरीय बैठक की। इस दौरान केंद्र सरकार ने ऐलान किया कि DRDO के कोविड अस्पताल में 250 से300 ICU बेड और शामिल किए जाएंगे, जिसे गम्भीर कोविड रोगियों का वहाँ इलाज किया जा सके। 10,000बेड वाले कोविड सेंटर को और सशक्त किया जाएगा।

आपको बता दें कि दिल्ली में मंगलवार ( 17 नवंबर, २०२० ) को 6396 नए केस आये जबकि इस खतरनाक बीमारी से 24 घंटे के अंदर 99 लोगों की मौत हो गई. दिल्ली की हालत इस समय बेहद भयावह है।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने कोरोना के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए लॉकडाउन लगाने के संकेत दिए थे लेकिन उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोसिया ने कहा है कि लॉकडाउन को लेकर अभी कोई निर्णायक फैसला नहीं लिया गया है।