किसान आंदोलन कर रहे लोगों से वरिष्ठ पत्रकार ने पूछे तीखे सवाल, 26/11 की तारीख किस किसान ने तय की

26 नवंबर, 2008 को मुंबई में हुए आतंकी हमलें की आज 12 वीं बरसी है, इस मौके पर देशवासी मुंबई 26/11 आतंकी हमलों में जान गंवाने वाले सभी लोगों को श्रद्धांजलि दे रहे हैं और आज ही के दिन केंद्र सरकार के किसान कानून के खिलाफ कुछ किसान पंजाब से दिल्ली की ओर बढ़ रहे हैं. इस किसान आंदोलन में शामिल लोगों से वरिष्ठ पत्रकार ने तीखे पूछे हैं, वरिष्ठ पत्रकार अशोक श्रीवास्तव ने कहा है कि 26/11 की तारीख किस किसान ने तय की? उन्होंने ट्वीट कर कहा कि आज आंदोलन नहीं होता तो न्यूज़ चैनल मुंबई आतंकी हमलें पर ओबामा के खुलासे की बात कर रहे होते।

डीडी न्यूज़ के एंकर व् वरिष्ठ पत्रकार अशोक श्रीवास्तव ने अपने ट्वीट में लिखा, आप चाहें तो मुझे किसान विरोधी कह सकते हैं, पर ये सवाल तो पूछुंगा कि किसान_आंदोलन_दिल्ली के लिए 26/11 की तारीख किस किसान ने तय की? उन्होंने अपने ट्वीट में आगे लिखा, आज आंदोलन नहीं होता तो न्यूज़ चैनल मुंबई आतंकी हमलें पर ओबामा के खुलासे की बात कर रहे होते और तुकाराम ओंबले की शहादत की कहानी कहते! जय जवान-जय किसान!

टीवी चैनलों पर आज सिर्फ किसान आंदोलन की कवरेज हो रही है, इसी की आड़ में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के खुलासे को दबा दिया गया है, ओबामा ने अपनी किताब ‘ए प्रॉमिस्ड लैंड’ में दावा किया है कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह मुंबई में 26/11 के आतंकी हमलों के बाद पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई करने से बच रहे थे। ओबामा ने लिखा है कि मनमोहन सिंह इस बात से चिंतित थे कि देश में मुस्लिम विरोधी भावनाएं बढ़ रही हैं और इसका सीधा फायदा बीजेपी को होगा।

गौरतलब है कि 26 नवंबर 2008 को लश्कर-ए-तैयबा के 10 आतंकवादी समुद्र के रास्ते यहां पहुंचे थे और गोलीबारी की थी जिसमें 18 सुरक्षाकर्मियों समेत 166 लोग मारे गए थे तथा कई लोग घायल हुए थे। इस दौरान एनएसजी और अन्य सुरक्षाबलों ने नौ आतंकवादियों को ढेर कर दिया था तथा अजमल आमिर कसाब नाम के आतंकवादी को जिंदा पकड़ लिया गया था जिसे 21 नवंबर 2012 को फांसी दे दी गई।

मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त राकेश मारिया ने ( 17 फ़रवरी 2019 ) को जारी अपनी पुस्तक ‘लेट मी से इट नाउ’ में दावा किया है कि पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा ने 26/11 के मुंबई आतंकी हमले को “हिंदू आतंकवाद” के रूप में पेश करने तथा पाकिस्तानी आतंकवादी मोहम्मद अजमल कसाब को बेंगलुरु के समीर चौधरी के रूप में मारे जाने की योजना बनाई थी। ( पूरी कहानी यहाँ पढ़ सकते हैं )

परन्तु अब देशवासियों को खासकर हिन्दुओं को शहीद तुकाराम ओंबले का शुक्रिया अदा करना चाहिए। जिन्होनें वीरगति को प्राप्त होकर ( जान गंवाकर ) आतंकी अजमल कसाब को जिन्दा पकड़ा था। जी हाँ? तुकाराम के कारण हिन्दुओं के माथे पर आतंकवाद का ठप्पा लगने से बच गया। कसाब को जिंदा पकड़ने के लिए मुंबई पुलिस के एएसआई शहीद तुकाराम ओंबले ने अपनी वीरता की ऐसी इबारत लिखी जिसे आनेवाली सदियां याद रखेंगी।

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