नीतीश कैबिनेट में मुस्लिमों को जगह न मिलने पर आरफा ने उठाया सवाल तो गिरिराज ने दिया मुंहतोड़ जवाब!

बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की जीत के बाद सोमवार ( 16 नवंबर, 2020 ) को सरकार का गठन भी हो गया, जनता दल यूनाइटेड ( जदयू ) प्रमुख सीएम नीतीश कुमार ने समेत 14 विधायकों ने मंत्रिपद की शपथ ली. इनमें से 7 विधायक बीजेपी कोटे और 5 नेता जेडीयू कोटे से मंत्री बने हैं. जबकि एक-एक मंत्री हिंदुस्तान आवाम मोर्चा ( हम ) और विकासशील इंसान पार्टी ( VIP) के कोटे से है.

बीजेपी और जेडीयू ने अपने नेताओं के नाम तय करने में जातिगत समीकरण का खास ख्याल रखा है. इन नेताओं के नाम सामने आ गए हैं. इनमें दलित, यादव, भूमिहार, ब्रह्मण, राजपूत जाति के नेता हैं. खास बात ये है कि पहली बार कोई भी मुसलमान मंत्री नहीं है. जिसपर आरफा खानम शेरवानी ने सवाल उठाया है.

द वायर की पत्रकार आरफा खानम शेरवानी ने टेलीग्राफ का एक आर्टिकल शेयर करते हुए अपने ट्वीट में लिखा, आजादी के बाद ऐसा पहली बार हुआ है कि देश के सबसे बड़े अल्पसंख्यक समुदाय ( मुस्लिम ) का कोई मंत्री नहीं बना है, आरफा के इस सवाल का केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने मुंहतोड़ जवाब देते हुए कहा कि मुस्लिमों ने हैदराबादी पार्टी को चुना। जिसका उद्देश्य कट्टरपंथ को बढ़ावा देना है.

बिहार के बेगूसराय से भाजपा सांसद और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि देश के सबसे बड़े अल्पसंख्यक समुदाय ( मुस्लिम ) ने हैदराबादी पार्टी ( असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी (AIMIM) को चुना। गिरिराज ने आगे लिखा, ये वही हैदराबादी पार्टी है जिसका एकमात्र लक्ष्य कट्टरपंथ को बढ़ावा देना है, गिरिराज ने आरफा को जवाब देते हुए कहा कि मैं आपसे ज्यादा इस मुद्दे पर दुखी हूँ.

बता दें कि नीतीश कैबिनेट में इस बार दो महिलाओं को शामिल किया गया है. वहीं ऐसा पहली बार हो रहा है कि नीतीश के मंत्रीमंडल में मुस्लिम मंत्री को जगह नहीं मिली है।