किसान आन्दोलन का उद्देश्य भारत विरोध और खालिस्तान समर्थन है: वकील प्रशांत पटेल

कृषि कानून के विरोध में कॉंग्रेस शासित पंजाब के किसानों ने दिल्ली कूच कर दिया है, कुछ लोग इस किसान आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं तो कुछ लोग इस किसान आंदोलन का न सिर्फ विरोध कर रहे हैं बल्कि इस आंदोलन को भारत विरोधी करार दे रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता प्रशांत पटेल ने भी किसान आंदोलन को भारत विरोधी करार दिया है. साथ ही उन्होंने कहा कि किसान आन्दोलन का उद्देश्य भारत विरोध व खालिस्तान समर्थन है. प्रशांत पटेल ने यह भी कहा है कि आन्दोलन हो पर आन्दोलन के पीछे एजेन्डा नहीं चलना चाहिये।

एडवोकेट प्रशांत पटेल ने अपने ट्वीट में लिखा, आन्दोलन हो पर आन्दोलन के पीछे एजेन्डा नहीं चलना चाहिये। किसान आन्दोलन का उद्देश्य भारत विरोध व खालिस्तान समर्थन है। उन्होंने आगे लिखा, किसान के नाम पर खालिस्तानियों के इमोशनल ब्लैकमेलिंग व राजनैतिक रूतबे का प्रदर्शन स्वीकार नहीं हो सकता। देश में किसी भी वर्ग की इमोशनल ब्लैकमेलिंग स्वीकार नहीं।

गौरतलब है कि कृषि कानून के विरोध में कॉंग्रेस शासित पंजाब 26 नवंबर को दिल्ली के लिए कूच कर दिए, किसानों ने न सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया और न ही किसी किसान के चेहरे पर मॉस्क दिखा। पंजाब के शंभू बॉर्डर की तरफ से दिल्ली जा रहे किसान प्रदर्शनकारियों का प्रदर्शन अचानक उग्र हो गया. सड़क पर लगे डिवाइडरों को नुकसान पहुंचाया और पुलिस कर्मियों पर पथराव भी किया।

इससे पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें एक कथित किसान ने धमकी देते हुए कहा कि कनाडा की धरती पर जाकर ठोक सकते हैं, दिल्ली क्या चीज़ है…इंदिरा ठोक दी..मोदी..

सोचनीय विषय यह भी है कि अगर केंद्र सरकार द्वारा लाया गया नया कृषि कानून वाकई किसान विरोधी है तो देशभर के किसान क्यों प्रदर्शन नहीं कर रहे हैं, क्यों सिर्फ पंजाब के किसान ही क्यों प्रदर्शन कर रही हैं. ध्यान रहे कि पंजाब में कॉंग्रेस की सरकार है. कुछ दिन पहले राहुल गांधी पंजाब गए थे कृषि कानून का विरोध करने।

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