अर्नब गोस्वामी की गिरफ़्तारी से गुस्से में देश, महाराष्ट्र में लगा अघोषित आपातकाल!

बुधवार ( 4 नवंबर, 2020 ) को तकरीबन सुबह साढ़े 6 बजे मुंबई पुलिस के जवान रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी के घर में घुसे और उन्हें जबरन घसीटकर लेकर चले गए अपने साथ, बताया जा है कि करीब 10 पुलिसकर्मी अर्णब गोस्वामी के घर पहुँचे थे। बाहर पुलिस की कई गाड़ियाँ भी लगी हुई हैं। हथियारबंद पुलिसकर्मियों ने ये बताया भी नहीं कि वो किस लिए वहाँ आए हैं। अर्नब गोस्वामी को उनके घर से मुंबई पुलिस का एनकाउंटर दस्ता घसीटकर ले गया।

अर्नब गोस्वामी की गिरफ़्तारी से पूरे देश में गुस्सा है, जिस मुम्बई में फैसला आने तक आतंकवादी को बिरयानी खिलाई गई, उस मुम्बई में एक पत्रकार के साथ मारपीट और गिरफ्तारी ऐसे की जा रही है कि जैसे कोई बड़ा अपराधी हो। मैं उद्धव सरकार के ऐसे कृत्य की निंदा करता हूँ। रिपब्लिक की खबरों पर आपत्ति थी तो सरकार को कोर्ट जाने चाहिए था।

केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा की मुंबई में प्रेस-पत्रकारिता पर जो हमला हुआ है वह निंदनीय है। यह इमरजेंसी की तरह ही महाराष्ट्र सरकार की कार्यवाही है। हम इसकी भर्त्सना करते हैं।

वरिष्ठ पत्रकार दीपक चौरसिया ने कहा कि अर्नब के साथ किया गया व्यवहार पूर्णत निंदनीय है। प्रजातंत्र में मतभेद होते है लेकिन सरकार अगर इसका बदला निकालेगी तो फिर लोकतंत्र कमजोर होगा।जो केस मुंबई पुलिस ने डाला है लीगली वो शायद ही कोर्ट में टिक पाएगा।रिपब्लिक के मुताबिक़ उन्हें 2018 के एक केस के मामले में फँसाया जा रहा है.

वरिष्ठ पत्रकार सुशांत ने ट्वीट कर कहा कि वैसे तो कांग्रेस का आपातकाल से लगाव सबके सामने है पर सोचिए कि अर्नब गोस्वामी को पुराना मामला खोलकर पुलिस उठाकर ले जाती है और रवीश कुमार के भाई के यौन शोषण के पुराने मामले को इग्नोर मारकर चुनाव का टिकट मिलता है।फिर भी ये और इनके पिद्दी पत्रकार दूसरों को गोदी मीडिया बताते नहीं थकते।