बुरा फंसा कुणाल कामरा, वकील रिजवान सिद्दीकी ने की अवमानना का मुकदमा चलाने की मांग

स्टैंडअप कॉमेडी के नाम पर फूहड़ता करने वाले कुणाल कामरा अब बुरी तरीके से फंस चुके हैं, जी हाँ! वरिष्ठ पत्रकार अर्नब गोस्वामी की जमानत के बाद कामरा ने माननीय सुप्रीम कोर्ट पर अपमानजनक टिप्पणी की थी. वकील रिजवान सिद्दीकी ने कामरा के खिलाफ अवमानना का मुकदमा चलाने की मांग की है. इसके लिए सिद्दीकी ने एटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल से सहमति मांगी है. सहमति मिलते ही मुकदमा शुरू हो जाएगा।

रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी को जमानत मिलनें के बाद कुणाल कामरा ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर विवादित ट्वीट किये थे. आदेश देने वाले न्यायाधीश धनञ्जय यशवंत उर्फ़ डी वाई चंद्रचूड़ के अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया था. आपको बता दें कि कुछ महीनें पहले कुणाल कामरा ने फ्लाइट में अर्नब गोस्वामी के साथ बेहूदा हरकत की थी, इसके बाद इंडिगो और एयरइंडिया एयरलाइंस ने कुणाल कामरा पर बैन लगा दिया था. फिर भी अपनी हरकतों से बाज नहीं आया. अब देश की सर्वोच्च अदालत पर अपमानजनक शब्दों का प्रयोग कर रहा रहा है.

गौरतलब है कि बुधवार ( 11 नवंबर 2020 ) को सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस इंदिरा बनर्जी की बेंच ने अर्नब गोस्वामी की जमानत याचिका पर सुनवाई की. सर्वोच्च अदालत ने न सिर्फ अर्नब गोस्वामी को जमानत दी बल्कि महाराष्ट्र सरकार पर तल्ख़ टिप्पणी भी की।

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि अगर हम आज इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करते हैं तो बर्बादी की राह पर बढ़ जाएँगे। उन्होंने कहा कि किसी की विचारधारा अलग हो सकती है और वो चैनल नहीं देखे, लेकिन संवैधानिक अदालतें अगर ऐसी आज़ादी की सुरक्षा नहीं करती हैं तो वो बर्बादी की राह पर बढ़ रही है।

महाराष्ट्र सरकार को फटकार लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर राज्य सरकार किसी व्यक्ति को निशाना बनाती है तो उसे पता होना चाहिए कि नागरिकों की स्वतंत्रता की रक्षा करने के लिए शीर्ष अदालत है। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि अगर संवैधानिक अदालत हस्तेक्षप नहीं करती तो, हम निश्चित रूप से विनाश की राह पर चल रहे हैं।