अर्नब गोस्वामी पत्रकार नहीं है, उन्होनें उद्धव सरकार को ललकारा, CP को अपमानित किया: रवीश कुमार

रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी को मुंबई पुलिस ने बुधवार ( 4 नवम्बर, 2020 ) को सुबह लगभग साढ़े 6 बजे उनके घर से गिरफ्तार कर लिया। आत्महत्या के लिए उकसाने के दो साल पुराने बंद केस में अर्नब की गिरफ़्तारी हुई।

अर्नब गोस्वामी की जिस तरीके से गिरफ़्तारी हुई वो सरकार और पुलिस पर संदेह पैदा करती है, यही वजह है कि देशभर में पत्रकार अर्नब गोस्वामी का विरोध हो रहा है, इन सबके बीच एनडीटीवी वाले रवीश कुमार ने अर्नब गोस्वामी को पत्रकार मानने से इनकार कर दिया है, फेसबुक पर दो बीघे का लेख लिखकर रवीश कुमार ने कहा कि अर्नब गोस्वामी पत्रकार नहीं हैं, वो मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को ललकारते हैं, मुंबई पुलिस कमिश्नर को अपमानित करते हैं।

इसके अलावा रवीश कुमार ने लिखा है कि अर्णब केंद्र सरकार के हिस्सा हो चुके हैं। अर्णब पत्रकार नहीं हैं। इसे लेकर किसी प्रकार का संदेह नहीं होना चाहिए। पत्रकारिता के हर पैमाने को ध्वस्त किया है। जिस तरह से पुलिस कमिश्नर को ललकार रहे थे वो पत्रकारिता नहीं थी। अर्नब गोस्वामी के गिरफ़्तारी की निंदा करने वाले न्यूज़ ब्राडकास्टर्स एसोसिएशन ( NBA ) की निंदा रवीश कुमार ने कर दी।

रवीश कुमार का कहना है कि अर्णब न्यूज़ ब्राडकास्टर्स एसोसिएशन के सदस्य नहीं हैं, हमेशा उन्होंने इस संस्था का मजाक उड़ाया है, इसके बावजूद उनकी गिरफ़्तारी की निंदा NBA कर रहा है।

रवीश का कहना है कि अर्नब गोस्वामी मोदी सरकार पर सवाल नहीं उठाते, बेरोज़गारी से लेकर किसानों के मुद्दे अपने चैनल पे नहीं दिखाए, उल्टा अर्णब गोस्वामी सरकार पर उठाने वालों को नक्सल से लेकर राष्ट्रविरोधी कहते हैं।

पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए रवीश ने लिखा, भारत की पुलिस पर आंख बंद कर भरोसा करना अपने गले में फांसी का फंदा डालने जैसा है। झूठे मामले में फंसाने से लेकर लॉक अप में किसी को मार मार कर मार देने, किसी ग़रीब दुकानदार से हफ्ता वसूल लेने और किसी को भी बर्बाद कर देने का इसका गौरवशाली इतिहास रहा है। पेशेवर जांच और काम में इसका नाम कम ही आता है। इसलिए किसी भी राज्य की पुलिस हो उसकी हर करतूत को संंदेह के साथ देखा जाना चाहिए। ताकि भारत की पुलिस ऐसे दुर्गुणों से मुक्त हो सके।