बिहार में शिवसेना का बुराहाल, 22 में से 21 उम्मीदवारों की जमानत जब्त, नोटा से भी कम वोट मिले

बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे 10 नवंबर, 2020 को देर रात आ गए, भाजपा के नेतृत्व में एक बार फिर से एनडीए बहुमत हासिल करने में कामयाबी रही है वहीँ महागठबंधन की उम्मीदों को करारा झटका लगा.बिहार चुनाव में 22 सीटों पर शिवसेना ने भी अपने प्रत्याशी उतारे थे. सबका बुराहाल हुआ है, बिहार वालों ने शिवसेना को कड़ा सबक सिखाया है. शिवसेना उम्मीदवारों का का प्रदर्शन नोटा से भी खराब है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 22 में से 21 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई. 2 उम्मीदवार को तो 50 वोट भी नहीं मिले।

बिहार विधानसभा चुनाव में शिवसेना को 0.05 फीसदी वोट मिले जबकि NOTA पर 1.68% मतदाताओं ने बटन दबाया. बिहार में पालीगंज सीट पर शिवसेना के मनीष कुमार को मजह 44 वोट मिले. इसी तरह गया शहर सीट पर बूटी सिन्हा को 49 वोट मिले जबकि वहीं नोटा पर 159 लोगों ने बटन दबाया.

आपको बता दें कि सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद लोगों में शिवसेना के प्रति काफी गुस्सा था, खासकर बिहार के लोगों में क्योंकि महाराष्ट्र में शिवसेना-कांग्रेस-एनसीपी की सरकार है और ये सब नहीं चाहते थे सुशांत को न्याय मिले। सुशांत बिहार के पटना से ताल्लुक रखते थे, शायद इसीलिए बिहार वालों ने शिवसेना को तगड़ा सबक सिखा दिया है।

बिहार में खराब प्रदर्शन के बाद कांग्रेस नेता संजय निरुपम ने तंज कसने में देर नहीं की. संजय निरूपम ने अपने ट्वीट में लिखा, शिवसेना बिहार में 22 सीटों पर लड़ी. सुनने पर पता चला कि उसे 21 सीटों पर नोटा से भी कम वोट मिले. इसलिए उन्हें कांग्रेस को सलाह देने की बजाय अपना मुंह बंद रखना चाहिए.