सुप्रीम कोर्ट में हुई हाथरस केस की सुनवाई, जानिये किस पक्ष के वकील ने क्या दलील दी

सुप्रीम कोर्ट में आज हाथरस केस की सुनवाई हुई, उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए थे, उन्होनें कहा कि अदालत ने परिवार की सुरक्षा और वकील की उपलब्धता पर जवाब मांगा था, हमनें हमने विस्तार से जानकारी देते हुए हलफनामा दाखिल किया है। परिवार ने बताया है कि उन्होंने सीमा कुशवाहा को वकील नियुक्त किया है.

पीड़िता परिवार की वकील सीमा कुशवाहा ने कहा कि हम हम मुकदमे का दिल्ली में ट्रांसफर चाहते हैं इसके साथ ही सीबीआई जांच की कोर्ट से निगरानी भी चाहते हैं, तुषार मेहता ने कहा कि पीड़ित परिवार सुप्रीम कोर्ट की निगरानी चाहता है। हम भी इसका समर्थन करते हैं. इसके बाद चीफ जस्टिस ने टिप्पणी करते हुए कहा कि पिछली बार मामला हाई कोर्ट भेजने की बात हुई थी। अब सब यहीं जिरह कर रहे हैं। सीजेआई ने कहा – हाइकोर्ट मामला देख सकता है। ज़रूरत हो तो सुप्रीम कोर्ट भी मौजूद है.

आरोपियों की तरफ से सिद्धार्थ लूथरा ने जिरह करना चाहा लेकिन इंदिरा जयसिंह ने इसका कड़ा विरोध करते हुए कहा कि आरोपी को बोलने का कोई हक नहीं, इसकी इजाज़त न दी जाय, इसके बाद यूपी सरकार के वकील तुषार मेहता ने कहा कि अपराधिक केस में ऐसे लोगों का बोलना भी आम होता जा रहा है, जिनका मामले से कोई रिश्ता नहीं, बतातें चलें की सिद्धार्थ लूथरा और इंदिरा जयसिंह को किसी पक्ष ने अपना वकील नहीं नियुक्त किया है ये दोनों वैसे ही इस मामलें में दखल दे रहे हैं.

वकील इंदिरा जयसिंह ने कहा है कि कोर्ट तय करे कि मुकदमा कहां चलेगा। अगर दिल्ली में चलेगा तो SC या दिल्ली HC निगरानी करे। पीड़ित परिवार को यूपी पुलिस की जगह CRPF सुरक्षा मिले, इसी दौरान लूथरा ने आरोपियों को हो रही किसी दिक्कत की बात कही लेकिन CJI ने उनसे उचित कोर्ट में जाने को कहा.

तीस्ता सीतलवाड़ के एनजीओ की तरफ से वकील अपर्णा भट्ट ने कुछ कहना चाहा, सॉलिसिटर जनरल ने इसका कड़ा विरोध करते हुए कहा कि पीड़ितों के नाम पर चंदा उगाहने और गबन करने का इनका अतीत रहा है। हमें इनकी अर्ज़ी पर एतराज़ है, इन्हें अनुमति न मिले।

यूपी के डीजीपी की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील हरीश सॉल्वे ने कहा कि पीड़ित परिवार को CRPF सुरक्षा की मांग की गई है। हम पीड़ित की सुरक्षा के लिए इसके लिए भी तैयार हैं। लेकिन कृपया इसे यूपी पुलिस पर नकारात्मक टिप्पणी की तरह न लिया जाए. इसपर सीजेआई ने कहा कि हमने यूपी पुलिस पर कोई नकारात्मक टिप्पणी नहीं की है. सभी की दलीलों को सुनने के बाद कोर्ट ने अभी तक कोई आदेश नहीं दिया है, जैसे ही आदेश आएगा तुरंत अपडेट कर दिया जाएगा।