एक तीर से कई निशाने लगा रहे शरद पवार, नासमझ बन बैठे हैं CM उद्धव ठाकरे

इन दिनों महाराष्ट्र सरकार/मुंबई पुलिस और रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के बीच तनातनी चल रही है, जो दिन-प्रतिदिन आक्रामक रुख अपना रही है, रिपब्लिक के खिलाफ की जा रही मुंबई पुलिस की कार्यवाही का तो विरोध हो ही रहा है साथ में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के खिलाफ भी लोग लिख रहे हैं, चूँकि महाराष्ट्र में इस समय शिवसेना-एनसीपी और कांग्रेस ( महाविकास अघाड़ी ) की सरकार चल रही है, ये तीनों पार्टियां एक दूसरी की कटटर विरोधी रही हैं लेकिन सत्ता के लिए एकजुट हो गई हैं।

पॉलिटिकल पंडितों की मानें तो मुंबई पुलिस कमिश्नर परमवीर सिंह के जरिये जानबूझकर रिपब्लिक टीवी के खिलाफ कार्यवाही करवाई जा रही है, और उद्धव-सोनिया की बदनामी हो रही है। परमबीर और शरद पवार की नजदीकियाँ किसी से छुपी नहीं है। रिपब्लिक के सम्पादक अर्नब गोस्वामी यह आरोप भी लगा चुके हैं कि परमबीर शरद पवार से मिले थे और उनके इशारे पर ही रिपब्लिक को निशाना बनाया जा रहा है।

लोगों का मानना है कि शरद पवार ने परमबीर सिंह के जरिये शिवसेना और कांग्रेस को ख़त्म करने का जाल बुना है, फार्मूला वही अपना रहे हैं सांप भी मर जाये और लाठी भी न टूटे। फिर भी उद्धव ठाकरे नासमझ बने हुए हैं, मुंबई पुलिस जब भी रिपब्लिक के खिलाफ कोई कार्यवाही करती है तो तुरंत उद्धव और कांग्रेस के खिलाफ लोग लिखना शुरू कर देते हैं। इस तरह से मुंबई पुलिस रिपब्लिक के खिलाफ जो कार्यवाही कर रही है उसका सबसे ज्यादा नुकसान उद्धव और कांग्रेस को है। जनता के प्रति उद्धव और कांग्रेस के प्रति गुस्सा बढ़ता ही जा रही है। जिसका असर चुनावों में दिख सकता है।

गौरतलब है कि हाल ही में परमबीर सिंह ने प्रेस-कॉन्फ्रेंस करके रिपब्लिक टीवी पर टीआरपी चोरी का आरोप लगाया था, हालाँकि ये दावा निराधार साबित हुआ, एफआईआर में रिपब्लिक का नाम था ही नहीं, इण्डिया टुडे का नाम था, इसके बाद अब मुंबई पुलिस ने रिपब्लिक के 1000 मीडियाकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है वहीँ कमिश्नर परमबीर सिंह ने रिपब्लिक से चार साल का हिसाब-किताब माँगा है, टॉयलेट पेपर से लेकर चाय के बिल तक की जानकारी माँगी है।