प्रसार भारती ने तोडा PTI से रिश्ता, केंद्र सरकार से पैसा लेकर चीनी प्रोपेगेंडा चलाती थी PTI

साभार - ऑपइण्डिया

नई दिल्ली, 17 अक्टूबर: देशविरोधी प्रोपोगैंडा चलाने की आरोपी न्यूज़ एजेंसी प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इण्डिया ( पीटीआई ) से प्रसार भारती ने अपने रिश्ते तोड़ दिए हैं अर्थात सबस्क्रिप्शन रद्द कर दिया है, केंद्र सरकार की ओर से पीटीआई को सलाना करोड़ों रूपये का फंड दिया जाता था, अब फूटी कौड़ी भी नहीं मिलेगी। प्रसार भारती ने पीटीआई के साथ-साथ न्यूज एजेंसी यूनिइटेड न्यूज ऑफ इंडिया का भी सब्सक्रिप्शन रद्द कर दिया है।

प्रसार भारती ने 15 अक्टूबर को लिखे पत्र में पीटीआई और यूएनआई को बताया कि उसके बोर्ड ने अंग्रेजी भाषा और अन्य मल्टीमीडिया सेवाओं के लिए डिजिटल सब्सक्रिप्शन हेतु सभी घरेलू न्यूज एजेंसीज से नए प्रस्ताव (बोलियां) मंगवाने का फैसला किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रसार भारती अपने समाचार सब्सक्रिप्शन के लिए पीटीआई को सालाना 6.85 करोड़ रुपए का भुगतान करता है।

आपको बता दें कि लद्दाख में गलवान घाटी में भारत और चीनी सैनिकों के मध्य हुई हिंसक झड़प के बाद न्यूज पीटीआई ने चीनी राजदूत को अपना प्रोपेगेंडा फैलाने के लिए मंच प्रदान किया था। पीटीआई साथ हुए एक साक्षात्कार में चीनी राजदूत सन वीडोंग ने गलवान घाटी में हुए टकराव के लिए पूरे दोष को भारत के ऊपर डाल दिया था। लेकिन आश्चर्य यह कि इस दौरान एक बार भी PTI ने चीनी राजदूत को सवालों से नहीं घेरा या उनके प्रोपेगेंडा फैलाने पर अंकुश लगाने की कोशिश की। पीटीआई के इस कुकृत्य के बाद ही भारत सरकार ने कठोर फैसला लेने का मन बना लिया था. अब आख़िरकार अंजाम तक पहुंचा ही दिया है.

पीटीआई की ‘देश विरोधी’ रिपोर्टिंग प्रसार भारती को नागवार गुजरी थे, प्रसार भारती ने उसी समय संकेत दे दिया था कि वो पीटीआई के साथ अपने संबंधों को आगे नहीं बढ़ाएगी और अब आधिकारिक तौर पर पीटीआई से रिश्ता तोड़ने का ऐलान किया है।

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