हाथरस केस: दो बड़े न्यूज़ चैनलों के पत्रकारों पर लग सकता है NSA, जातीय नफरत फ़ैलाने का आरोप

हाथरस, 5 अक्टूबर: हाथरस केस में न सिर्फ राजनीति हो रही है बल्कि जमकर जातीय नफरत भी फैलाई जा रही है, इसमें कुछ मीडिया संस्थान अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। दूध को दूध और पानी को पानी करने के लिए योगी सरकार ने इस मामलें को सीबीआई को सौंप दिया है। पीडिता का परिवार मना करता रहा पर सरकार ने फिर भी केस सीबीआई को सौंप दिया ताकि दोषी को सजा मिल सके और निर्दोष बच सके।

ये अपने आप मे कदाचित ऐसा पहला मामला है जहाँ पीड़ित परिवार सीबीआई जांच से मना कर रहा है जबकि आरोपियों का परिवार सीबीआई जांच का स्वागत कर रहा है, हाथरस का मामला तो सीबीआई के पास चला गया पर योगी सरकार अब पत्रकारिता के नाम पर उत्तर प्रदेश में सांप्रदायिक और जातीय नफरत फैलाने वाले पत्रकारों पर कार्यवाही की तैयारी कर रही है।

मिली जानकार के मुताबिक, योगी सरकार के रडार पर 2 मीडिया संस्थान के पत्रकार है, जो हाथरस के पीड़ित परिवार को 50 लाख दिलवा रहे थे साथ ही प्रियंका वाड्रा के साथ लड़की के परिवार की सेटिंग करवा रहे थे, ये पत्रकार जमकर अफवाह फ़ैलाने का भी काम कर रहे थे, एक एजेंडा के तहत बता रहे थे कि पीड़िता की जीभ काटी गई, रीढ़ की हड्डी तोड़ दिय गई, टाँगे तोड़ दी गई, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह दावे हवा-हवाई साबित हुए।

गौरव प्रधान ने अपने ट्वीट में लिखा है कि दो पत्रकारों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून ( रासुका ) लगाया जा सकता है, सरकार ने दो मीडिया संसथान की पहचान की है, एक है एबीपी न्यूज़ और दूसरा इंडिया टुडे जो आजतक ग्रुप का अंग्रेजी न्यूज़ चैनल है।

गौरतलब है कि आजतक के एक पत्रकार का ऑडियो लीक हुआ था जिनमे वो दलित परिवार से अपने मन मुताबिक विडियो बनवाने को कह रहे थे साथ ही वो प्रियंका वाड्रा के साथ परिवार की डील भी करवा रहे थे, जल्द ही दोनों पत्रकारों के नाम सामने आ जायेंगे जिनके खिलाफ कार्यवाही होने जा रही है, योगी सरकार किसी भी छोड़ने के मूड में नहीं है।

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