बिहार चुनाव: आखिर JDU ने क्यों नहीं दिया गुप्तेश्वर पांडेय को टिकट, सामने आई ये बड़ी वजह

पटना, 8 अक्टूबर: खाकी उतारकर खादी पहन के विधायक बनने का सपना देखने वाले बिहार के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय को बड़ा झटका लगा है, जी हाँ! चुनाव लड़ने के लिए गुप्तेश्वर पांडेय ने रिटायर होने से 5 महीनें पहले नौकरी से यानि डीजीपी पद से वीआरएस ले लिया अर्थात स्वेक्षा से सेवानिवृत्त।

इसके बाद सीएम नीतीश कुमार की मौजूदगी में जनता दल यूनाइटेड ( जेडीयू ) में शामिल हो गए और बक्सर विधानसभा सीट से चुनाव की तैयारियां भी करने लगे। लेकिन जब टिकट बँटवारा हुआ तो उनको टिकट नहीं मिला, आखिर गुप्तेश्वर पांडेय को जेडीयू ने टिकट क्यों नहीं दिया, इसको लेकर बड़ी वजह सामने आई है।

मालूम हो कि सुशांत सिंह राजपूत मामलें को लेकर जिस तरह डीजीपी रहते हुए गुप्तेश्वर पांडेय ने बयान दिए और राजनैतिक टिप्पणी की, उसके बाद यदि भाजपा उन्हें अपना टिकट देती तो उसका नुकसान भविष्य में महाराष्ट्र में देखने को मिल सकता था।

आपको बता दें कि महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस इन दिनों बिहार में चुनाव का काम देख रहे हैं, ऐसे में यदि गुप्तेश्वर का टिकट होता तो महाराष्ट्र में ये संदेश जाता की गुप्तेश्वर के बयानों के पीछे भाजपा और देवेंद्र फड़नवीस हैं. भाजपा इस रिस्क को लेना नहीं चाहती।

पॉलिटिकल पंडितों का यह भी कहना है कि भाजपा के दबाव में ही जेडीयू ने भी गुप्तेश्वर पांडेय को टिकट नहीं दिया, चूँकि पांडेय बक्सर से चुनाव की तैयारी कर रहे थे इसलिए बक्सर सीट भाजपा को दे दी। और भाजपा ने गुप्तेश्वर की जगह दूसरे कैंडिडेट को मैदान में उतार दिया। बक्सर से भाजपा का टिकट न मिलने के बाद गुप्तेश्वर पांडेय ने जेडीयू से किसी अन्य सीट के लिए हाथ पैर मारना शुरू किया. लेकिन फिलहाल भाजपा और जेडीयू में उनके लिए पूरी तरह से दरवाजे बंद कर दिए गए हैं।

टिकट न मिलने का बाद गुप्तेश्वर पांडेय ने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा, अपने अनेक शुभचिंतकों के फ़ोन से परेशान हूँ। मैं उनकी चिंता और परेशानी भी समझता हूँ। मेरे सेवामुक्त होने के बाद सबको उम्मीद थी कि मैं चुनाव लड़ूँगा लेकिन मैं इस बार विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ रहा। हताश निराश होने की कोई बात नहीं है। धीरज रखें। मेरा जीवन संघर्ष में ही बीता है। मैं जीवन भर जनता की सेवा में रहूँगा। कृपया धीरज रखें और मुझे फ़ोन नहीं करे। बिहार की जनता को मेरा जीवन समर्पित है। अपनी जन्मभूमि बक्सर की धरती और वहाँ के सभी जाति मज़हब के सभी बड़े-छोटे भाई-बहनों माताओं और नौजवानों को मेरा पैर छू कर प्रणाम! अपना प्यार और आशीर्वाद बनाए रखें।