गिद्धों और दंगाइयों की वजह से हाथरस की पीड़िता का करना पड़ा रात में अंतिम संस्कार

हाथरस के चंदपा क्षेत्र के बूलगढ़ी में कथित गैंगरेप की शिकार पीड़िता की मौत के बाद पुलिस और जिला प्रशासन ने रात में ही पीड़िता का अंतिम संस्कार कर दिया, दिल्ली से शव लाने के बाद पुलिस ने परिवार की इजाजत लेकर लगभग रात को ढाई और 3 बजे के बीच पीड़िता का अंतिम संस्कार किया। पुलिस और जिला प्रशासन द्वारा रात में अंतिम संस्कार कराये जाने को लेकर लोगों में काफी आक्रोश था।

लोग यह जांनना चाहते थे कि आखिर रात में अंतिम संस्कार क्यों कर दिया, क्यों सुबह होनें का इन्तजार नहीं किया गया, इसको लेकर उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दिया है जिसमें विस्तार से बताया गया है कि आखिर रात में पीड़िता का अंतिम संस्कार क्यों कर दिया गया।

यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि कथित रूप से हाथरस में सामूहिक दुष्कर्म की शिकार हुई पीड़िता का अंतिम संस्कार रात में इसलिए किया गया क्योंकि ऐसी खुफिया सूचनाएं मिली थीं कि युवती और आरोपी के समुदायों के लाखों लोग राजनीतिक कार्यकर्ताओं के साथ उसके गांव में इकट्ठा होंगे।

यूपी सरकार का कहना है कि अगर शव को रखकर आंदोलन किया जाता तो कानून व्यवस्था बिगड़ सकते थी, कोरोना काल में वैसे भी भीड़ जुटना खतरे से खाली नहीं है, इसी को मद्देनजर रखते हुए पुलिस और जिला प्रसाशन ने रात में ही पीड़िता का अंतिम संस्कार कर दिया।

अगर रात में अंतिम संस्कार न किया गया होता तो सुबह राजनितिक गिद्ध घिनौनी राजनीतिक करते, दंगाई भी दंगा करने के फिराक में थे, खुफिया एजेंसिंयों ने यह भी बताया है कि हाथरस केस की आड़ में यूपी में दंगे कराने की साजिश रची जा रही थी, इसके लिए रातों-रात वेबसाइट तैयार की गई, इसमें कट्टर इस्लामिक संगठन पीएफआई और एसडीपीआई ने मुख्य भूमिका निभाई। यूपी पुलिस ने पीएएफआई के 4 सदस्यों को गिरफ्तार भी किया है, इसमें मास्टरमाइंड भी शामिल है।