व्यंग: मैं चाहे जितना झूठ बोलूं तुम मेरा कुछ नहीं उखाड़ सकते अर्नब, क्योंकि मेरे पास बेबी पेंग्विन है

सुनों अर्नब गोस्वामी, मेरा नाम परमवीर सिंह भड़ाना है, मैं मुंबई का पुलिस कमिश्नर हूँ, मैं चाहे जितना झूठ बोलूं, यहाँ तक कि एफआईआर में इंडिया टुडे का नाम होनें के बावजूद मैं प्रेस-कॉन्फ्रेंस करके रिपब्लिक टीवी को सरेआम टीआरपी चोर कहकर बदनाम कर दूँ, फिर भी तुम मेरा कुछ नहीं नहीं उखाड़ सकते हो, चाहे जितने सबूत दिखाओ अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए, जानना चाहते हो क्यों? क्योंकि मेरे पास बेबी पेंग्विन है।

अरे भाई अर्नब गोस्वामी तुम तीन महीनें से लगातार मेरे खिलाफ अभियान चला रहे हो, मेरे प्रिय बेबी पेंग्विन और संजय राउत को उल्टा-सीधा बोल रहे हो, रोज शाम सात बजे रिपब्लिक भारत पर “पूछता है भारत” कार्यक्रम के दौरान चिल्ला-चिल्लाकर कहते हो परमवीर इस्तीफा दो, अरे भाई कोई इस्तीफा देने के लिए नौकरी करता है क्या?

अर्नब गोस्वामी तुम जानना चाहते हो मैनें, पुलिस कमिश्नर बनने के कितना झूठ बोला है, कितनी मक्कारी की है, तो सुनो- खददरधारियों का चरण वंदन किया है, छोटा पुलिस अधिकारी रहते हुए घोटाले में संलिप्त खददरधारियों को क्लीन चिट दिया हूँ, पुलिस की वर्दी पहनने से पहले शपथ ली थी कि किसी के खिलाफ द्वेषभावना नहीं रखूंगा, निष्पक्ष कार्य करूंगा, इसकी भी बलि चढ़ा दिया हूँ, तब जाकर मैं पुलिस कमिश्नर बना हूँ और तुम रोज-रोज मेरा अस्तीफा मांगते हो। ऐसे कैसे चल पायेगा, ऐसा करोगे तो झूठ तो बोलूंगा ही, वर्दी की बदनामी हो रही है, इससे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। वैसे अर्नब भाई मेरी कोई गलती नहीं है, मेरा रिमोट कंट्रोल किसी दूसरे के हाथ में हैं। मुझसे तो जो बुलवाया जाता है वही बोल देता हूँ।

अर्नब तुम तीन महीनें से चीख-चीखकर परमवीर का इस्तीफा मांग रहे हो, जब मैं सुनता हूँ तो मुझे बहुत तक़लीफ़ होती है, मैनें एक दिन पूरे देश के सामने प्योर सफ़ेद झूठ बोलकर हिसाब बराबर कर लिया, और हमनें सुना है तुमनें मुझे कोर्ट में घसीटने की धमकी दी है, देखो अर्नब ये तुम्हारे बस की बात नहीं है, क्योंकि तुम ठहरे एक पत्रकार और मैं ठहरा एक पुलिस कमिश्नर। इसके अलावा बेबी पेंग्विन भी मेरे साथ है तो बताओ तुम मेरा क्या कर सकते हो। इसलिए मेरे और बेबी पेंग्विन के खिलाफ बोलना छोड़ दो। जैसे ज्यादातर चैनल हमारा और हमारे साहब बेबी पेंग्विन का चरणबंदन करते हैं, रिया को निर्दोष बताते हैं, वैसे तुम भी करो।

नोट – यह एक व्यंग है, इसे सीरियस न लें।