आर्मीनिया-अजरबैजान युद्ध: देश के लिए लड़ते हुए शहीद हो गए आर्मीनिया के पूर्व सांसद और उनका बेटा!

तस्वीर साभार - अभिषेक उपाध्याय वरिष्ठ पत्रकार

आर्मीनिया और अजरबैजान के बीच पिछले तीन हफ्ते से घमासान युद्ध जारी है, ये युद्ध काराबाख इलाके को लेकर हो रहा है। इस युद्ध को कवर करने के लिए देश के जाने-माने पत्रकार अभिषेक उपाध्याय ( वर्तमान में टीवी-9 भारतवर्ष में एडिटर हैं ) आर्मीनिया पहुंचे हैं, अभिषेक ने एक ऐसी तस्वीर भेजी है जो राष्ट्रवाद की असली परिभाषा समझाती है।

ऊपर दी गई तस्वीर में आर्मीनिया के पूर्व सांसद और उनका बेटा है, जो वतन के लिए लड़ते हुए शहीद हो गए, इस तस्वीर को देखने के बाद लोग यही कह रहे हैं कि असली नेता तो वही है जो देश के लिए कुर्बान हो जाये, ऐसे नेताओं को सैल्यूट है।

वरिष्ठ पत्रकार अभिषेक उपाध्याय ने आर्मीनिया के पूर्व सांसद की एक अन्य तस्वीर अपने ट्विटर हैंडल पर शेयर करते हुए लिखा, ये काराबाख की लड़ाई में मारे गए आर्मीनिया के एक पूर्व MP की तस्वीर है। आर्मीनिया के सांसदों में होड़ लगी है जंग के मैदान में जाने की।

अभिषेक ने अपने ट्वीट में लिखा, राष्ट्रवाद का जलवा क्या होता है, आर्मीनिया आकर देखा। यहां बच्चा-बच्चा काराबाख की जंग में उतरने को बेकरार है। चप्पे-चप्पे पर काराबाख के झंडे लहरा रहे हैं जिन पर हैशटैग लिखा है-“जीतेंगे हम।” यहां किसी की औकात नही जो बोल दे कि काराबाख अजरबैजान का है। यहां अलगाववादी नही पलते। मालूम हो कि भारत में अलगाववादी पलते हैं जो रहते भारत में हैं, खाते भारत का हैं लेकिन गुणगान पाकिस्तान-चीन का करते हैं। फारूक अब्दुल्ला जैसे नेता और महबूबा मुफ्ती जैसी नेताइन तो अलगाववादियों से भी एक कदम बढ़कर हैं।

अभिषेक ने आर्मीनिया-अजरबैजान युद्ध का एक और रोचक किस्सा बताते हुए कहा कि एक आर्मीनियाई महिला महिला सांसद से उनका इंटरव्यू तय था पर वे अचानक ही काराबाख निकल गईं युद्ध लड़ने, आप इसी से अंदाजा लगा सकते हैं कि क्या नेता, क्या आम आदमी, आर्मीनिया के हर व्यक्ति में राष्ट्रवाद कूट-कूटकर भरा है, आर्मीनिया के लोग इस्लामिक मुल्क तुर्की से बेइंतिहा नफरत करते हैं, बतातें चले कि ये वही तुर्की है जो भारत के खिलाफ जहर उगलता है लेकिन भारत के ही आमिर खान जैसे लोग तुर्की जाकर वहां के राष्ट्रपति की बीबी से बातचीत करते हैं। आमिर खान को भारत में डर लगता है लेकिन घोर कटटर तुर्की में इन्हें डर नहीं लगता।

आपको बता दें कि आर्मीनिया और अजरबैजान के बीच हो रहे युद्ध में अबतक सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है, काराबाख इलाके को लेकर दोनों देशों के बीच छह साल लंबा चला युद्ध 1994 में समझौते के साथ समाप्त हो गया था. उसके बाद से ये अब तक का सबसे हिंसक संघर्ष है. जो लगातार 22 दिन से जारी है।