संसद में गूंजा ‘विकास दुबे’ एनकाउंटर का मुद्दा

8 पुलिसकर्मियों को मौत के घाट उतारने वाले कुख्यात अपराधी विकास दुबे को उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने एनकाउंटर में ढ़ेर कर दिया, इस एनकाउंटर के बाद काफी बवाल भी हुआ। सपा, बसपा व् कांग्रेस ने इस एनकाउंटर को जातिवादी रंग देने की भी कोशिश की, अब विकास दुबे के एनकाउंटर का मामला संसद भी पहुँच गया।

मानसून सत्र के दौरान सोमवार को लोकसभा में बसपा सांसद रितेश पांडेय ने विकास दुबे एनकाउंटर का मुद्दा उठाया, उन्होंने कहा कि ‘इस तरह की हत्याएं समाज के लिए खतरा हैं। योगी सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि ‘पुलिस मुठभेड़ और हिरासत में हुई हत्याओं से लोगों का पुलिस में विश्वास कम हुआ है।

बीएसपी सांसद के मुताबिक, विकास दुबे को कानून के अनुसार दंडित किया जाना चाहिए था, जिससे यह आम व्यक्ति का कानून और शासन में विश्वास बना रहे। इसके बाद, बसपा सांसद ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय कानून और न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद से इस मुद्दे पर संज्ञान लेने और व्यवस्था में सुधार के लिए प्रयास करने का आह्वान किया।

बता दें कि दो जुलाई को कानपुर के बिकरू गांव में पुलिस की टीम दुर्दांत अपराधी विकास दुबे को गिरफ्तार करने गई थी। इस दौरान विकास दुबे और उसके साथियों ने दाबिश देने गई पुलिस बल पर हमला कर दिया, जिसमें सीओ समेत आठ पुलिसकर्मी शहीद हो गए। इस घटना में कई अन्य लोग घायल हो गए। विकास दुबे और उनके अन्य साथी मौके से भागने में सफल रहे।

9 जुलाई की सुबह उज्जैन में विकास की गिरफ्तारी के बाद मध्य प्रदेश पुलिस ने दुबे को यूपी एसटीएफ टीम को सौंप दिया। 10 जुलाई को सरकारी वाहन से कानपुर लाते समय विकास दुबे ने भागने की कोशिश की। इस दौरान उन्होंने पुलिसकर्मी की बंदूक भी छीन ली फायरिंग की। पुलिस द्वारा की गई जवाबी कार्रवाई में विकास दुबे ढेर हो गया, इसके अलावा विकास दुबे के कई और साथी भी अलग-अलग एनकाउंटर में ढ़ेर कर दिए गए. जो बाकि थे वे सरेंडर कर दिए.

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