श्रीलंका में “गौहत्या” पर लगा बैन, बौद्धों की मांग पर प्रधानमंत्री ने लिया ऐतिहासिक फैसला

श्रीलंका सरकार ने गौहत्या पर प्रतिबन्ध लगाने का फैसला किया है, श्रीलंका की महिंदा राजपक्षे सरकार ने बौद्धों की मांग पर गौहत्या पर बैन लगाने का फैसला किया है, लगभग 2 करोड़ की आबादी वाले भारत के पडोसी देश श्रीलंका में लगभग 70 फीसदी बौद्ध धर्म का और लगभग 12.6 प्रतिशत हिंदू धर्म का पालन करते हैं। बौद्ध धर्म को देश का राजकीय धर्म माना जाता है और इसे कुछ विशेष विशेषाधिकार दिए गए हैं जैसे कि सरकारी संरक्षण और श्रीलंका के संविधान में बौद्ध धर्म को बढ़ावा देना।

लंबे समय से SLPP पार्टी के तहत प्रभावशाली बौद्ध भिक्षु सरकार पर धार्मिक गतिविधियों के साथ-साथ दैनिक उपभोग के लिए गाय के वध पर प्रतिबंध लगाने का दबाव बना रहे हैं। हाल के समय में देश ने गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध के लिए आवाज उठाते हुए काफी विरोध देखा है। श्रीलंका में सत्तारूढ़ पार्टी केे संसदीय दल, श्रीलंका पोदुजाना पेरमुना (SLPP) ने 8 सितंबर 2020 को श्रीलंका में गौ वध पर प्रतिबंध लगाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

श्रीलंकन मीडिया के मुताबिक़, कैबिनेट प्रवक्ता केहलिया रामबुकवेला ने कहा कि एसएलपीपी संसदीय समूह की बैठक में प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे ने कहा था कि उन्हें पशु वध पर प्रतिबंध लगाने की उम्मीद है। मंत्री ने ये भी कहा कि “प्रधानमंत्री द्वारा कोई आधिकारिक प्रस्ताव प्रस्तुत नहीं किया गया था, लेकिन वह जल्द ही इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने की उम्मीद करते हैं।

श्री लंका केे प्रधानमंत्री महिंद्रा राजपक्षे ने कहा है कि गोमांस के लिए गोवध को प्रतिबंधित करने के प्रस्ताव को उनके संसदीय समूह ने मंजूरी दे दी है। यह अल्ट-सिंहला समूहों द्वारा मुस्लिम विरोधी अभियानों की जीत है। मांस के लिए चिकन, बकरियों आदि को मारने की अनुमति होगी !

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