एक ही रात में हवा हो गई संजय सिंह समेत आठों अभद्र सांसदों की क्रांति, धूप लगते ही भाग खड़े हुए

रविवार को राज्यसभा में अभद्रता व् गुंडागर्दी करने वाले ‘आम आदमी पार्टी’ के सांसद संजय सिंह समेत आठ सांसदों को राज्यसभा के उपसभापति वेंकैया नायडू ने सस्पेंड कर दिया, इसके विरोध में आठों सांसद धरने पर बैठ गए, लेकिन इनकी क्रांति एक ही रात में हवा हो गई।’ सुबह धूप निकलते ही सब अपने सरकारी बंगले में भाग गए।

दरअसल संजय सिंह समेत आठों सांसदों को बदतमीजी, संसद का अपमान, उपसभापति पर हमले की कोशिश, संसद के मार्शलों से मारपीट और गाली गलौच करने के कारण संसद से निलंबित किया गया हैं, पर मर्यादा की सारी सीमाएं तोड़ते हुए इन सांसदों ने कहा कि हम संसद में ही रुकेंगे।

क्रांति के नाम पर संसद में ही रुके आठों सांसदों ने पहले बंगाली मार्केट से खाना मंगवाकर डिनर किया, किसी प्रकार की दिक्कत न हो, इसके लिए इन सासंदों ने घरो से गद्दे , तकिये, पंखे, औडोमास आदि मंगवाए। संसद के अधिकारियों की तरफ से भी विशेष पंखे, चाय कॉफी और चादरों की व्यवस्था की गई।

इन सांसदों का ये तमाशा सुबह होते-होते फ्लॉप हो गया। सुबह धूप आनी शुरू ही हुई थी कि सांसदों की सांसें फूलने लगी। किसी माननीय को पसीने आने लगे, किसी माननीय को चक्कर जैसा लगने लगा। सब अपनी ऐसी गाड़ियों में बैठकर भाग खड़े हुए। इन सांसदों ने पहले सदन में गुंडागर्दी की इसके बाद नाख़ून कटवा कर शहीद बनने की कोशिश में अपनी ही बेज्जती करवा बैठे।

सुबह होते होते क्रांति का हौसला टूट चुका था माननीयों का, अपने अपने पार्टी आलाकमान से घर जाने दो, यहां और नहीं रुक सकते, गर्मी में मर जायेंगे की गुहार लगाने लगे थे कुछ सांसद। सुबह जब तक खेतों में किसानों ने हल उठाया तब तक किसानो के नाम पर क्रांति करने वाले सांसद भागकर एसी कमरों में बंद हो चुके थे और ऐसी कमरों में बैठकर खुद को क्रन्तिकारी बताते हैं। हालाँकि अब किसान भी इनकी फर्जी क्रांति देख चुका है।

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