महाराष्ट्र पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में कहा- पालघर साधु लिंचिंग केस में न हो CBI जाँच

बीते अप्रैल महीनें में महाराष्ट्र के पालघर में पुलिस के सामनें उन्मादी भीड़ ने दो हिन्दू संतों को पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया था, देशवासियों ने इस मामलें में सीबीआई जांच की मांग की लेकिन महाराष्ट्र पुलिस ने शुरू से ही सीबीआई जांच का विरोध किया, अब तो महाराष्ट्र पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में हफलनामा दायर करके कहा है कि पालघर साधु लिंचिंग केस में CBI जाँच न हो और जो सीबीआई जांच की मांग करने वाली याचिका दायर करे उस याचिकाकर्ता पर जुर्माना लगे.

पुलिस का कहना है कि राज्य CID गहन जाँच के बाद पहले ही 126 आरोपितों के ख़िलाफ़ दो चार्जशीटें दायर कर चुकी है इन चार्जशीटों को भी कोर्ट में दाखिल किया गया है।

ऑपइण्डिया के मुताबिक़, हलफनामे में उन पुलिसकर्मियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई का विवरण है, जिन्होंने अपराध को रोकने या अपनी जिम्मेदारियों के निर्वहन में लापरवाही बरती। इस हलफनामे के अनुसार, जो भी पुलिसकर्मी दोषी पाए गए, उन्हें बर्खास्त किया गया या फिर उन्हें न्यूनतन आय की श्रेणी में डाल दिया गया।

इसमें बताया गया कि विभागीय जाँच में दोषी पाए गए अस्सिटेंट पुलिस इस्पेक्टर (ASI) आनंदराव शिवाजी काले को सर्विस से बर्खास्त किया गया है। इसके अलावा असिस्टेंट पुलिस सब इस्पेक्टर रविंद्र दिनकर सालुंखे और हेडकांस्टेबल नरेश ढोंडी को कंपल्सरी रिटायरमेंट दिया गया है। वहीं लापरवाही के दोषी पाए गए 15 दूसरे पुलिस कर्मियों को 2-3 साल के लिए न्यूनतम आय दिए जाने का दंड दिया गया है।

इस मामले में पिछली सुनवाई 6 अगस्त को हुई थी। उस सुनवाई में कोर्ट ने महाराष्ट्र पुलिस से इस मामले में दायर चार्जशीट माँगी थी। साथ ही इस मामले में लापरवाही के लिए जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की ब्यौरा भी माँगा था। जिसके जवाब में पुलिस ने हलफनामा दायर करके ब्योरा दिया।