कश्मीर से ख़त्म हुआ उर्दू का राज, हिंदी समेत 5 भाषाओँ को मिला आधिकारिक दर्जा, लोकसभा में बिल पास

मोदी सरकार ने जम्मू- कश्मीर के लोगों की वर्षों पुरानी मांग पूरी की। लोकसभा ने मंगलवार को जम्मू-कश्मीर आधिकारिक भाषा विधेयक-2020 को मंजूरी प्रदान कर दी जिसमें डोगरी, कश्मीरी और हिंदी को जम्मू- कश्मीर की आधिकारिक भाषा का दर्जा देने का प्रावधान है। इसके मुताबिक पहले से ही आधिकारिक भाषा का दर्जा पाए हुए उर्दू और अंग्रेजी के साथ ही अब डोगरी, कश्मीरी एवं हिंदी भी वहाँ की आधिकारिक भाषा बनेगी।

आपको बता दें कि साल 1957 से लेकर 31 अक्टूबर, 2019 तक, जम्मू और कश्मीर में दो आधिकारिक भाषाएँ थीं। उर्दू को आधिकारिक भाषा का दर्ज़ा प्राप्त था और अंग्रेजी को आधिकारिक व्यवहार के लिए प्रयोग किया जाना था I

वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, केंद्र साशित प्रदेश जम्मू और कश्मीर की कुल जनसंख्या करीब सवा करोड़ थी। वर्तमान में प्रदेश में उर्दू भाषा बोलने वाले लोगों की संख्या सिर्फ़ 19,112 थी, यानी जनसंख्या का सिर्फ़ 0.16 फ़ीसदी I अंग्रेजी बोलने वालों की संख्या तो और कम, यानी आबादी का सिर्फ 0.1 फ़ीसदी थी। यह दिलचस्प तथ्य है कि पिछले सात दशकों में जम्मू और कश्मीर में स्थापित आधिकारिक भाषाओं को बोलने वालों की संख्या कुल जनसंख्या का एक फ़ीसदी भी नहीं थी. यहां तक कि कश्मीरी भाषा भी आधिकारिक भाषाओं की सूची में नहीं शामिल थी। लेकिन अब शामिल हो गई। राज्यसभा में बिल पास होते ही अमल में आ जाएगी।

प्रस्तावित आधिकारिक भाषाएँ बोलने वालों की संख्या

कश्मीरी – 53.26%
डोगरी – 20.64%
उर्दू – 0.16%
हिंदी – 2.30%
अंग्रेज़ी – 0.01%

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