रामेश्वरम से अयोध्या तक 2500 KM की पैदल यात्रा करेंगें उपदेश राणा, मोदी-योगी सरकार और रामभक्तों को देंगें धन्यवाद

अयोध्या में बुधवार ( 5 अगस्त 2020 ) को राममंदिर भूमिपूजन कार्यक्रम संपन्न हुआ, इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, आरएसएस प्रमुख डॉ मोहन भागवत समेत 175 लोग मौजूद थे, राममंदिर भूमिपूजन को लेकर न सिर्फ देश में बल्कि विदेशों में भी उत्साह का माहौल है।

राम मंदिर निर्माण शुरू होनें की ख़ुशी में और केंद्र की मोदी व् उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार को धन्यवाद देनें के लिए उपदेश राणा रामेश्वरम से लेकर अयोध्या तक पैदल यात्रा करेंगें। उपदेश राणा यह यात्रा 20 अगस्त से शुरू करेंगें। उपदेश राणा ने अपनी इस यात्रा का नाम “संकल्प यात्रा” दिया है। उपदेश राणा की इस “संकल्प यात्रा” भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने भी समर्थन किया है।

युवा हिंदूवादी नेता उपदेश राणा ने बताया कि 20 अगस्त से रामेश्वरम से अयोध्या जी तक पैदल यात्रा करूंगा। रामश्वेरम से रामनगरी अयोध्या लगभग 2500 किलोमीटर पड़ेगा, उपदेश राणा ने कहा कि इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य केंद्र तथा राज्य सरकार व हर राम भक्त को धन्यवाद देना है।

रामेश्वरम से लेकर अयोध्या तक की पैदल यात्रा को लेकर उपदेश राणा ने कहा कि श्री रामेश्वरम से अयोध्या जी के लिए यह संकल्प लेकर मन में चलूंगा कि जिस न्यायिक और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत श्री राम मंदिर का निर्माण संभव हुआ है उसी न्यायिक तथा संवैधानिक प्रक्रिया के तहत काशी तथा मथुरा के मंदिरों का भी निर्माण हो..

गौरतलब है कि अयोध्या में राममंदिर का निर्माण सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हो रहा है, हिन्दुओं ने लगभग 500 सालों तक कोर्ट में लम्बी लड़ाई तब कहीं जाकर राममंदिर निर्माण सुनिश्चित हो पाया। अब लोग चाहते हैं कि मथुरा और काशी के भी मंदिरों का निर्माण हो।

रामेश्वरम के बारे में जानिये जहाँ से उपदेश राणा शुरू करेंगें पैदल यात्रा।
रामेश्वरम हिंदुओं का एक पवित्र तीर्थ स्थान है। यह तमिलनाडु के रामनाथपुरम जिले में स्थित है। यह तीर्थ हिन्दुओं के चार धामों में से एक है। रामेश्वरम चेन्नई से लगभग सवा चार सौ मील दक्षिण-पूर्व में है। यह हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी से चारों ओर से घिरा हुआ एक सुंदर शंख आकार द्वीप है। बहुत पहले यह द्वीप भारत की मुख्य भूमि के साथ जुड़ा हुआ था, परन्तु बाद में सागर की लहरों ने इस मिलाने वाली कड़ी को काट डाला, जिससे वह चारों ओर पानी से घिरकर टापू बन गया। यहां भगवान राम ने लंका पर चढ़ाई करने से पूर्व पत्थरों के सेतु का निर्माण करवाया था, जिसपर चढ़कर वानर सेना लंका पहुंची व वहां विजय पाई। आज भी सेतु के अवशेष सागर में दिखाई देते हैं।

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