आख़िरकार नेपाल के PM केपी ओली को समझ आ गई चीन की चालबाजी, PM मोदी को फोन कर बताई आपबीती

पिछले कुछ हफ़्तों से नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली भारत विरोधी रवैया अपनाये हुए थे, उत्तराखंड के कुछ क्षेत्रों को नेपाल का बताकर नया नक्शा भी जारी कर दिए थे। संसद से पास भी करवा लिए थे, अयोध्या को फर्जी बता दिए। सीमा पर गोलीबारी करवा के कई भारतीयों की जान ली। केपी ओली ये सब चीन के इशारे पर कर रहे थे लेकिन पीठ में छूरा घुपने के बाद अब केपी ओली को चीन की चालबाजी समझ आ गई है। जी हाँ! चीन की चालबाजी समझने के बाद नेपाल के प्रधानमंत्री केपी ओली ने तुरंत अपने परम् मित्र भारत को याद किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन करके आपबीती सुनाई।

आपको बता दें कि 15 अगस्त को नेपाल के PM के पी शर्मा ओली ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन किया था, ये फोन कॉल ऐसे समय में हुआ है जब पिछले कुछ महीनों में नेपाल और भारत के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया था, जानकारों का कहना है कि चीन की विस्तारवादी नीति से परेशान होकर नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली अपनी रणनीति बदल रहे हैं, इसलिए उनको अब भारत याद आ रहा है।

दरअसल बात यह है कि चीन ने चालाकी से काम लेते हुए नेपाल के प्रधानमंत्री केपी ओली को भारत के खिलाफ भड़का दिया और खुद नेपाल के रुई गाँव पर कब्जा कर दिया। इसको लेकर अब नेपाल में ओली सरकार से सवाल पूछे जा रहे हैं, नेपाल में यह उस वक्त बड़ा मुद्दा बन गया जब नेपाली जमीन पर चीन के कब्जे का खुलासा करने वाले नेपाली पत्रकार बलराम बनिया का शव मिला, पत्रकार का शव मिलनें के बाद ह्त्या की आशंका जताई गई।

पत्रकार बलराम बनिया की मौत को लेकर नेपाल के पत्रकार संगठन निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। उधर हिंदू बहुल नेपाल में पाकिस्तान में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार से भी गुस्सा है। ऐसे में ओली पर चौतरफा दबाव पड़ रहा है, ऐसे में ओली ने भारत के सामने झुकना मुनासिब समझा।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चौतरफा बन रहे दबाव के बीच केपी ओली ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात की और अपनी पूरी आपबीती सुनाई। इसके बाद भारत की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि प्रधानमंत्री मोदी ने नेपाल के पीएम को टेलीफोन कॉल के लिए धन्यवाद दिया और भारत और नेपाल के सदियों पुराने और सांस्कृतिक संबंधों को याद किया।

आपको बता दें कि चीन ने नेपाल के उत्तरी गोरखा में रुई गांव पर किया कब्‍जा कर लिया है, इस गाँव में तकरीबन 72 घर आते हैं। नेपाल सरकार, गोरखा गांव में चीन के अतिक्रमण की बातों को छिपा दिया है। गोरखा का रुई गांव जो गोरखा के रुई भोट के अंतर्गत आता है, अब चीन के स्वायत्त क्षेत्र तिब्बत के कब्‍जे में आ गया है। चीन ने ये सब बेहद चालाकी से किया, जिसे नेपाल को अब समझ आ रहा है।

हालाँकि नेपाल के प्रधानमंत्री केपी ओली ने चीन के इशारे पर जो भारत विरोधी रवैया अपनाया था नेपाल की जनता उसके खिलाफ थी, नेपाल में खुद ओली के पुतले फूंके जा रहे थे क्योंकि भारत और नेपाल को सदियों से मिली-जुली संस्कृति एक करती रही है। दोनों देशों के बीच बेटी-रोटी का रिश्ता इतना गहरा है कि कभी लगा ही नहीं कि दो देश हैं। लेकिन चीन अपनी चालबाजी से दोनों देशों के बीच दरार डालना चाहता था लेकिन अब शायद ओली की बुद्धि खुल गई है। इसलिए अब चीन अपने मकसद में कामयाब नहीं हो पायेगा।