अपने ISIS आतंकी शौहर युसूफ के बचाव में उतरी बीबी, बोली- मेरे 4 बच्चे हैं, मेरे शौहर को..?

दिल्ली पुलिस की स्पेशल ने जबरदस्त कार्य करते हुए खूंखार आतंकी संगठन ISIS के एक आतंकी अबू यूसुफ़ को मुठभेड़ में दिल्ली के लालकुआं से गिरफ्तार कर लिया, आतंकी युसूफ बहुत बड़े आतंकी हमले को अंजाम देने की फ़िराक में था, कई हिन्दू नेता आतंकी के निशाने पर थे।

आतंकी अबू युसूफ के गिरफ्तार होने के बाद अब उसकी बीबी उसके बचाव में उतर आई है, युसूफ की बीबी का कहना है कि माफ़ कर दिया जाय, मेरे 4 बच्चे हैं, कहाँ जाउंगी।

न्यूज़ एजेंसी एएनआई के मुताबिक, गिरफ्तार किये गए ISIS के खूंखार आतंकवादी अबू युसूफ की बीबी ने कहा है कि मेरे शौहर ने घर पर गोला-बारूद और अन्य सामग्री जमा कर रखी थी, बकौल युसूफ की बीबी, जब मैंने उनसे कहा कि आपको ये सब नहीं करना चाहिए तो उसने मुझे कहा कि तुम मुझे ऐसा करने से मत रोको। इसके बाद आतंकी की बीबी ने कहा विक्टिम कार्ड खेलते हुए कहा कि मेरे चार बच्चे हैं, अब मैं कहा जाऊँगी, काश मेरे शौहर को माफ़ किया जा सके।

अब सवाल यह उठता है कि अगर ISIS के खूंखार आतंकवादी अबू युसूफ की पत्नी को उसके बारे में सारी जानकारी थी तो उसने पुलिस को जानकारी क्यों नहीं दी, क्यों राज दबा के बैठी थी, गिरफ्त्तार होने के बाद विक्टिम कॉर्ड खेल रही है.

आपको बता दें कि गिरफ्तार करने के बाद आतंकी युसूफ को उत्तर प्रदेश के बलरामपुर उसके गांव ले जाया गया तो पता चला कि उसका असली नाम मुस्तकीम है और वो पुलिस से झूंठ बोल रहा था। आतंकी के घर में खुदाई के दौरान कई खतरनाक सामान मिले जिससे यह प्रतीत होता है कि वो किसी बड़े हमले की फ़िराक में था।

पुलिस ने आतंकी युसूफ के घर से दो मानव बम वाले जैकेट, काफी मात्रा में विस्फोटक पदार्थ बरामद किया है। करीब चार घंटे तक पुलिस ने उसकी पत्नी से पूंछतांछ की जिसके बाद मजदूरों को बुलाकर उसके घर की खुदाई करवाई गई। खुदाई में ये विस्फोटक पदार्थ और मानव बम वाले जैकेट मिले हैं।

दोपहर करीब 12 बजे जैसे ही बलरामपुर पुलिस को सूचना मिली कि जिले के भैसही गांव के युवक को दिल्ली पुलिस ने पकड़ा है और उसे आईएसआईएस का आतंकी बताया जा रहा है तभी पुलिस ने उसका गांव सील कर दिया और दिल्ली पुलिस जब मुस्तकीम को गांव लेकर पहुँची तब पता चला कि उसका असली नाम अबू यूसुफ़ नहीं मुतकीम है। गांव के लोगों का कहना है कि मुस्तकीम अधिकतर गायब रहता है। कभी दो महीने बाद गांव आता था तो कभी एक दो हफ्ते में। उसके घर के आस-पास के घरों में भी तलाशी अभियान चलाया गया।