दलित दरोगा ने पीट-पीटकर उधेड़ी थी फ़ौजी परिवार की चमड़ी, CM योगी ने लिया संज्ञान, दरोगा पर हुई कार्यवाही

गाजीपुर, 2 अगस्त: उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में थानाध्यक्ष रमेश कुमार और अन्य पुलिसकर्मियों ने मिलकर भूतपूर्व फौजी कमल कुमार पांडे और उनके परिवार परिवार की पीट-पीटकर चमड़ी उधेड़ दी थी, पीड़ित फौजी परिवार ने पिटाई के बाद चोट का वीडियो और फोटो सोशल मीडिया पर वायरल किया है, पिटाई की इन बर्बर तस्वीरों को देखकर रूह काँप जाए, जिसके बाद खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले में संज्ञान में लिया और आरोपी एसओ रमेश कुमार को एसपी ने लाइन हाजिर कर दिया। साथ ही मुख्यमंत्री ने कड़ी जाँच के आदेश दिए हैं। ये पूरी घटना गाज़ीपुर जिले के ग्राम नूरपुर स्थित हाल्ट थाने की है, जहां एक जातिवादी दरोगा रमेश कुमार द्वारा पीड़ित को ब्राह्मण होने की वजह से बिना सबुत थाने में बंद कर घंटो लगातार पीटा गया।

दलित दरोगा की बर्बरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जब पीड़ित पिटाई से छटपटाने लगे व उनके मुँह से राम राम निकलने लगा तो आरोपी दरोगा ने और पीटते हुए कहा कि “सालो राम राम नहीं भीम-भीम बोलो। मैं तुम जैसे ब्राह्मण ठाकुरो को सबक सीखाने ही पुलिस में भर्ती हुआ हु। पिटाई से पीड़ितों कि चमड़ी तक उधड़ गई।

जातिवाद की धुन में सनके दलित दरोगा ने झूठे आरोपों में चालान कर परिवार के 9 पीड़ितों को जेल भेज दिया। पीड़ितों की तस्वीरें देखनें के बाद किसी की भी रूह काँप जाए, वहीं मेडिकल कराने की बजाये पीड़ितों को जेल भेज दिया गया। पीड़ितों ने किसी तरह कोर्ट से जमानत हासिल की। वहीँ दरोगा ने अपना बचाव करते हुए कहा है कि ये सब मनगढ़ंत आरोप हैं, हालाँकि तस्वीरें झूठ नहीं बोलती।

जमानत मिलनें के बाद भी जब पीड़ितों ने FIR दर्ज कराने के लिए थाने का रुख किया तो माँ बहन की गालिया बकते हुए बेइज्जत करके व झूठे मुक़दमे में फ़साने की धमकी देते हुए उन्हें थाने से भगा दिया गया। पीड़ितों में सबसे अधिक गंभीर हालत सुशील पांडेय की हैं, उनके शरीर के पीछे का पूरा हिस्सा बता रहा है कि कितनी बेरहमी से पिटाई की गई है.

क्या है पूरा मामला
जानकारी के अनुसार, घर में पीड़ितों की बड़ी माता माया देवी का 15 जुलाई को निधन हो गया था जिसके बाद 27 जुलाई को आत्मा की शांति के लिए उनका श्राद्ध होना था। श्राद्ध के दौरान पीड़ित के सगे सम्बन्धी भी पीड़ित के घर पहुंचे थे। लेकिन 26 जुलाई को शाम 6 बजे के करीब जब पीड़ित सुशील पांडेय अपनें परिवार के लोगों के साथ श्राद्ध में आने वालो के लिए भोजन की व्यवस्था कर रहे थे तभी सादी वर्दी में थाना प्रभारी रमेश कुमार राम अपने अन्य 6 पुलिस साथियों के साथ वहां पंहुचा था।

बताया जा रहा है कि थाना प्रभारी ने झूठा आरोप मढ़ते हुए गाली देकर कहा कि तुम लोग घर में झनकू पांडेय को छुपा कर बैठे हो। जिसपर घर के लोगो ने सबसे पहले तमीज में बात करने की बाते कही। बस इतना कहते ही थानाप्रभारी ने ललकारते हुए अपने साथियो से कहा कि साले इन भिखारी ब्राह्मणो कि आज हड्डिया तोड़ दो। जिसके बाद सभी पुलिसकर्मियो ने मिलकर लाठी डंडो व बन्दुक के बट से मारना पीटना शुरू कर दिया। जिसके बाद कई लोग बचने के लिए घर में घुस गए।

पुलिसकर्मियो ने घर में घुसकर पीड़ितों को मारना पीटना व घर में सभी सामानो को तोडना शुरू कर दिया। पीड़ितों कि चीखे सुनकर गाँव के लोग इकठ्ठा हो गए तो पुलिसकर्मी उन्हें गाड़ी में भरकर थाने ले गए जहां क्रूरता की सभी हदे पार कर दी गई। पीड़ितों को रात भर थाने में पीटा गया। चीख पुकार मचने पर उन्होंने उनके मुँह पर मुक्के मारने भी शुरू कर दिए। पिटाई से जब पीड़ितों पूरा बदन छील गया तो पीड़ित रोते हुए राम राम करने लगे। राम राम सुनते ही थाना प्रभारी और भड़क गया। उसने अपने जूते को पीड़ितों को मुँह में भरते हुए कहा कि राम राम नहीं भीम भीम बोलो, मैं तुम जैसे ब्राह्मण ठाकुरो को ही सबक सीखाने पुलिस में भर्ती हुआ हूँ। साभार – फलाना फलाना

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