सिर्फ ब्राह्मणों का वोट लेने के लिए परशुराम प्रेमी बने घूम रहे अखिलेश यादव, काला सच आया सामने

लखनऊ, 25 अगस्त: गैंगस्टर विकास दुबे के एनकाउंटर के बाद उत्तर प्रदेश में परशुराम’ और ब्राह्मण राजनीति अपने चरम पर है, अखिलेश यादव, मायावती और कांग्रेस पार्टी खुद को ब्राह्मणों का हितैषी बताने में लगी हुए है। दूसरी ओर योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि राम और परशुराम में कोई भेद नहीं है। सपा से लेकर बसपा तक ‘परशुराम’ की नाव पर सवार होकर सत्ता के वनवास को खत्म करने की कोशिशों में हैं।

गैंगस्टर विकास दुबे के एनकाउंटर को गलत ठहराते हुए अखिलेश यादव ने कहा था कि उत्तर प्रदेश में ब्राह्मणों के साथ अन्याय हो रहा है, और तो और अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि अगर उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनती है तो पूरे प्रदेश में भगवान परशुराम की प्रतिमा लगेगी। हालाँकि अखिलेश यादव ये सब ब्राह्मणों के वोट के लिए कर रहे हैं या सच में भगवान परशुराम से प्रेम हैं, इसका काला सच सामने आ गया है, जी हाँ!

समाजवादी पार्टी के भगवान परशुराम प्रेम का काला सच सामने उस समय सामने आ गया जब पार्टी ने 14 नवनिर्वाचित जिलाध्यक्षों के नाम का ऐलान किया। सपा ने जो सूचि जारी की है उसमें 14 में से एक भी ब्राह्मण नहीं है. अगर अखिलेश यादव को सचमुच भगवान परशुराम से प्रेम और ब्राह्मणों से लगाव होता तो एकात ब्राह्मण जरूर होता, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इससे साफ़ हो गया है कि अखिलेश यादव सिर्फ ब्राह्मणों का वोट लेने के लिए खुद को भगवान परशुराम प्रेमी घोषित कर रहे हैं।

सपा ने जो 14 जिलाध्यक्षों की सूचि जारी की है उसमें पहले की तरह यादवों को तरजीह दी गई है, नीचे देखिये पूरी सूची, समाजवादी पार्टी की ओर से ये सूचि 24 अगस्त 2020 को जारी हुई थी।