CM योगी की दयालुता का गलत फायदा उठा रहे पुलिस अफसर, समय पर करें कार्यवाही तो न घटें ऐसी घटनाएं

लखनऊ, 22 जुलाई: साल 2017 में उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री पद की कुर्सी संभाली और अपराध मुक्त यूपी बनानें का सपना देखा, इसके लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश पुलिस को खुली छूट भी दी और समय-समय पर पुलिस की हर मांगो को पूरा किया ताकि अपराधियों से लोहा लेते वक्त पुलिस को किसी भी प्रकार की दिक्कत न हो। पुलिस ने कई कुख्यात अपराधियों को ठिकानें को तो लगाया लेकिन यूपी पुलिस के कुछ पुलिस वालों ने कई ऐसे शर्मनाक कारनामें भी किये जिसके कारण योगी सरकार की जमकर फजीहत हुई। शर्मिंदगी झेलनी पड़ी।

अभी 2 दिन पहले गाजियाबाद के विजयनगर में पत्रकार विक्रम जोशी को कुछ बदमाशों ने सरेआम रोड पर खड़े कराकर गोली मारकर ह्त्या कर दी, विक्रम जोशी का कसूर सिर्फ इतना था कि उनकी भांजी को कमालुद्दीन का लड़का छेड़ता था इसकी शिकायत उन्होंने स्थानीय चौकी में भी की परन्तु पुलिस ने मामलें को गंभीरता से नहीं लिया, इसके बाद विक्रम जोशी की हत्या कर दी गई, इस घटना के बाद राज्य की विपक्षी पार्टियां लगातार योगी सरकार पर हमलावर हैं, कानून व्यवस्था पर सवाल उठा रही हैं, अगर पुलिस ने समय रहते कार्यवाही की होती तो न विक्रम जोशी की जान जाती और न ही किसी को योगी सरकार के खिलाफ बोलने का मौक़ा मिलता।

बलात्कार के आरोपी कुलदीप सिंह सेंगर मामलें में भी पुलिस लीपापोती करती रही, इसमें भी सरकार की काफी ज्यादा फजीहत हुई। हाल ही में अगर पुलिस के कुछ अफसर दुर्दांत अपराधी विकास दुबे पर समय रहते कड़ी कार्यवाही किये होते तो 8 पुलिसकर्मियों की जान न जाती, फिलहाल यूपी एसटीएफ ने विकास दुबे को एनकाउंटर में ढ़ेर कर दिया, ध्यान रहे विकास दुबे को मध्यप्रदेश पुलिस ने गिरफ्तार करके दिया था, यूपी पुलिस हफ़्तों तक छापेमारी करती रही पर विकास पकड़ में नहीं आया था, इस मामलें में भी सरकार पर सवाल उठे।

इसी तरह हिंदूवादी नेता कमलेश तिवारी के हत्यारों को भी यूपी पुलिस नहीं पकड़ पाई थी, गुजरात पुलिस ने गिरफ्तार करके यूपी पुलिस को सौंपा था। लखनऊ में हुए विवेक तिवारी हत्याकांड में भी सरकार की काफी फजीहत हुई थी। ऐसे कई काण्ड हैं जिसमें पुलिस की वजह से सरकार को शर्मिंदगी झेलनी पड़ी।

पुलिस के कुछ आला अधिकारी अपराधियों से सांठ-गाँठ कर लेते हैं और उन्हें बचानें का पूरा प्रयास करते हैं, लिहाजा एक दिन जघन्य अपराध हो जाता है और सरकार एवं राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े होनें लगते हैं। कुल मिलाकर यह कहना गहलत नहीं होगा कि कुछ पुलिस अफसर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दयालुता का गलत फायदा उठा रहे हैं।

अगर पुलिस जनता की शिकायतों का संज्ञान ले और तकाल कार्यवाही करे तो पुलिस की भी तारीफ होगी और सरकार एवं कानून व्यवस्था पर सवाल भी नहीं खड़े होंगें।

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