सपा नेता IP Singh बोले, UP पुलिस भी आत्मनिर्भर बन गयी है, अब उन्हें अदालतों की जरूरत नहीं है

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कानपुर:  सपा नेता और पूर्व राज्य मंत्री आईपी सिंह ने भी विकास दूबे और उसके साथियों के एनकाउंटर पर सवाल उठाते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस पर कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने ट्विटर पर लिखा – UP पुलिस भी ‘आत्मनिर्भर’ बन गयी है, अब उन्हें अदालतों की जरूरत नहीं है।

आपको बता दें कि विकास दुबे और उसके पांच अन्य साथियों का पिछले एक हप्ते में एनकाउंटर कर दिया गया है लेकिन विकास दूबे और उसके ख़ास साथी प्रभात मिश्रा का एनकाउंटर करीब करीब एक जैसा हुआ। प्रभात मिश्रा को फरीदाबाद में गिरफ्तार किया गया और उसे ट्रांजिट रिमांड पर यूपी लाया गया था, कानपुर पहुँचते ही पुलिस की गाडी पंक्चर हुई, प्रभात मिश्रा ने भागने की कोशिश की और पुलिस ने उसका एनकाउटर कर दिया।

इसी तरह से विकास दूबे का भी एनकाउंटर कर दिया गया. उसे उज्जैन में गिरफ्तार किया गया और यूपी पुलिस को ट्रांजिट रिमांड पर दिया गया, कानपुर पहुँचते ही पुलिस की गाडी पलट गयी, उसके बाद विकास दूबे ने एक पुलिसकर्मी की पिस्टल छीनकर भागने की कोशिश की, कथित तौर पर उसने पुलिसकर्मियों पर फायरिंग भी की उसके बाद पुलिस ने उसका एनकाउंटर कर दिया। इसीलिए अखिलेश यादव ने इस एनकाउंटर पर संदेह जताया है।

अनुमान के अनुसार हुआ विकास दुबे का एनकाउंटर

आपको बता दें कि पहले से जिस बात का अनुमान लगाया जा रहा था आज वही हुआ है, पहले से ही अनुमान जताया जा रहा था कि विकास दूबे को अदालत नहीं पहुँचने दिया जाएगा और रास्ते में ही उसका एनकाउंटर कर दिया जाएगा। लोगों का अनुमान सच साबित हुए और यूपी पुलिस ने विकास दूबे का एनकाउंटर का दिया।

गौरतलब है की कल उज्जैन पुलिस ने विकास दुबे को महाकाल मंदिर से गिरफ्तार किया था। आठ घंटे पूछताछ करने के बाद यूपी एसटीएफ के हत्थें सौंप दिया। विकास दूबे पर कानपुर में आठ पुलिसकर्मियों की ह्त्या का आरोप था।

कई लोगों के राज हुए दफ़न

अपने सीने में अनगिनत राज छुपाये विकास दूबे की कहानी ख़त्म हो गयी और इसके साथ ही वो सभी राज भी दफ़न हो गए। विकास दूबे के एनकाउंटर की वजह से इसके मददगार बनकर काम करने वाले पुलिसकर्मियों और इसे संरक्षण देने वाले नेताओं की टेंशन भी ख़त्म हो गयी क्योंकि अब इनकी पोल नहीं खुल पाएगी। सबको पता है कि 8 पुलिसकर्मियों की हत्या में कानपुर पुलिस के कुछ पुलिसकर्मियों ने ही विकास दूबे का सहयोग किया था और उसे पुलिसकर्मियों की रेड की सूचना दे दी थी, इसी वजह से विकास दूबे ने पहले से तैयारी की और पुलिसकर्मियों के आते ही उनपर ताबड़तोड़ फायरिंग करके 8 पुलिसकर्मियों की जान ले ली।

लोग उठा रहे सवाल

कुछ लोग विकास दुबे के एनकाउंटर को फेक बता रहे हैं और इसपर सवाल उठा रहे हैं। इन लोगों का कहना है कि पुलिस की गाड़ियां कानपुर पहुँचते ही क्यों खराब हो जाती हैं। एक को उज्जैन से लाया गया लेकिन रास्ते में कुछ नहीं हुआ, जैसे ही पुलिस की गाडी कानपुर पहुंची, गाडी पलट गयी और बदमाश के भागने की बात कहकर उसका एनकाउंटर कर दिया गया। दूसरे को फरीदबाद से लाया गया लेकिन उस वक्त भी पुलिस की गाडी कानपुर पहुँचते ही खराब हो गयी और पुलिस ने भागने की बात कहकर उसका एनकाउंटर कर दिया।

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