प्रशांत भूषण के समर्थन में उतरे रविश कुमार, सुप्रीम कोर्ट पर ही खड़े कर दिए सवाल?

नई दिल्ली, 23 जुलाई: सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए वकील प्रशांत भूषण के आपत्तिजनक ट्वीट के मामले में अवमानना कार्रवाई शुरू की है और मामले में संज्ञान लेते हुए प्रशांत भूषण को नोटिस जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसलें के बाद एनडीटीवी के पत्रकार रविश कुमार प्रशांत भूषण के समर्थन में उतर आये हैं और सुप्रीम कोर्ट पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने प्रशांत भूषण के खिलाफ अवमानना मामलें में अटॉर्नी जनरल से भी पक्ष रखने को कहा है। प्रशांत भूषण ने हाल ही में कुछ ट्वीट किए थे जिनमें से कुछ को सुप्रीम कोर्ट ने आपत्तिजनक माना है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में टि्वटर आईएसी को भी पक्षकार बनाने को कहा है।

सुप्रीम कोर्ट की इस कार्यवाही के बाद एनडीटीवी के पत्रकार रविश कुमार ने फेसबुक पर अंग्रेजी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस का एक आर्टिकल शेयर करते हुए प्रशांत भूषण के खिलाफ की जा रही अवमानना की कार्यवाही का विरोध किया।

रविश कुमार ने अपनें फेसबुक पोस्ट में लिखा, छोटा सा ही है। इंडियन एक्सप्रेस के संपादकीय को पढ़ सकते हैं। वकील प्रशांत भूषण के ट्विट पर सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना का नोटिस भेजा है, संपादकीय इसी पर है। जहां कोर्ट के सामने कई महत्वपूर्ण मसले आने के लिए लंबे समय से इंतज़ार कर रहे हैं वहाँ ऐसी व्यर्थ चीजों के लिए समय निकालना कोर्ट की उदारता पर सवाल खड़े करता है। एक अदालत को सख़्त भी होना चाहिए और उदार भी। अवमानना कई देशों में ख़त्म हो चुकी है। बहरहाल। मतलब रविश कुमार का मानना है कि सोशल मीडिया पर भले ही कोई कुछ भी उल्टा-सीधा बोले लेकिन उसपर कार्यवाही करना गलत है, बहरहाल?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रशांत भूषण के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने यह ऐक्शन उनके न्यायपालिका के खिलाफ अपमानजनक ट्वीट्स के मद्देनजर लिया है। अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि प्रशांत भूषण के किस ट्विट्स को सुप्रीम कोर्ट ने अदालत की अवमानना के दायरे में रखा है. भूषण कोविड-19 महामारी में प्रवासी मजदूरों की दुर्दशा से जुड़ी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के खिलाफ काफी मुखर रहे और उनकी तीखी आलोचना करते रहे।

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