विकास दुबे के हाथ में हथकड़ी लगाकर क्यों नहीं ले जा रही थी पुलिस, ये थी वजह…?

कानपुर, 10 जुलाई: दुर्दांत अपराधी और 8 पुलिसकर्मियों के हत्यारोपी विकास दुबे को यूपी एसटीएफ ने एनकाउंटर में ढ़ेर कर दिया। विकास दुबे के एनकाउंटर के बाद पुलिस पर सवाल भी उठ रहे हैं और पुलिस की तारीफ भी हो रही है।

विकास दुबे को उज्जैन से यूपी लाते हुए गाडी पलट गई कानपुर में और विकास दुबे ने हथियार छीनकर फायरिंग की और भागनें की कोशिश की। आत्मरक्षा में पुलिस ने गोली चला दी गोली लगनें के गंभीर रूप से घायल हुए विकास दुबे की हैलट अस्पताल में मौत हो गई है। इस एनकाउंटर में चार पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि एसटीएफ आख़िर कुख्यात अपराधी विकास दुबे के हाथ में हथकड़ी क्यों नहीं लगाई थी।

नवभारत टाइम्स के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने अपने कई आदेशों में अपराधियों को हथकड़ी लगाए जाने पर अपनी नाराजगी जाहिर की और इसे ‘अमानवीय, अतार्किक, बेहद कठोर और मनमाना’ करार दिया। दूसरी तरफ पुलिस अलग-अलग न्यायिक मंचों पर हथकड़ी लगाने का यह कहते हुए बचाव करती रही है कि इससे दुर्दांत अपराधियों के हिरासत से नहीं भाग पाने की गारंटी रहती है।

सर्वोच्च न्यायालय ने उन आरोपियों को हथकड़ी लगाने की प्रक्रिया को लेकर समय-समय पर दिशा-निर्देश जारी किया है जिन पर दोष सिद्ध नहीं हुआ हो और मुकदमा खत्म नहीं हुआ हो। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नहीं भागने की गारंटी का मतलब नहीं है कि हथकड़ी अनिवार्य रूप से लगाई ही जाए। सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 19 का हवाला देते हुए कहा कि जब किसी कैदी के अंगों को बांधने की जरूरत नहीं हो तो ऐसा करना उसे प्रताड़ित करने जैसा है। कोर्ट ने कहा कि ऐसा मनमानापूर्ण व्यवहार आर्टिकल 14 का खुला उल्लंघन है। फिलहाल विकास दुबे के एनकाउंटर के बाद हथकड़ी वाला मुद्दा एक बार फिर से गरमा गया है।

गौरतलब है कि विकास दुबे पर कानपुर के बिकरू गाँव में आठ पुलिसकर्मियों की ह्त्या का आरोप था, इस वारदात में शामिल विकास दुबे समेत कई बदमाश का पुलिस ने एनकाउंटर कर दिया जबकि कई बदमाशों को गिरफ्तार कर लिया।

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