पूरा भारत गाय को गौमाता का दर्जा देता है लेकिन पेटा इण्डिया ने तो रिलेशन ही चेंज कर दिया

नई दिल्ली, 17 जुलाई: जब-जब कोई हिन्दू त्यौहार आता है तो पेटा इंडिया एक्टिव हो जाता है, कृष्ण जन्माष्टमी के बाद पेटा ने इस बार हिंदुओं के पवित्र त्यौहार रक्षाबंधन को गाय के मांस से जोड़ने की आपराधिक कोशिश की हैं। PETA इंडिया ने जगह-जगह विज्ञापन लगाकर रक्षाबंधन पर गाय की खाल का इस्तेमाल ना करने की अपील की हैं।

गाय हमारी बहनें हैं: पेटा
पेटा इंडिया के इस फैसले का लोग जब विरोध करनें लगे तो पेटा ने गाय का रिलेशन ही बदल दिया, पूरा भारत गाय को गौतमाता का दर्जा देता है ( ज्यादातर मुस्लिमों को छोड़कर ) लेकिन पेटा ने अब गाय को बहन का दर्जा दिया है, एक ट्वीट का जवाब देते हुए पेटा इण्डिया ने लिखा, “गायें भी हमारी बहने हैं और रक्षाबंधन के इस पवित्र त्यौहार पर हमें अपनी इन्हीं बहनों की रक्षा करने का संकल्प लेना है। हमारी तरह वह भी हड्डी, माँस और खून से बनी हैं और वह भी जीना चाहती हैं”।

पेटा को नहीं पता है भारत की संस्कृति
पेटा इंडिया द्वारा गाय को बहन बताये जानें के बाद भाजपा नेता आशा नाकम ने पेटा को लताड़ते हुए कहा कि हमारी संस्कृति को नहीं जानते तो झूठी हमदर्दी मत जताओ, गाय हमारी पूज्य माता है, बहन नहीं और हम गाय की पूजा से सम्मान करते है, सावन में गाय के नाम उपवास करते है। हमारे कितने शूरवीरों ने गाय की रक्षा करने हेतु अपने प्राण का बलिदान दिया है।

हिंदुओं के खिलाफ नैरेटिव बनाने की कोशिश करता है पेटा
गौरतलब है कि हर जगह यही पढ़ाया जाता है कि गाय हमारी माता हैं, यहाँ तक अगर गाय पर निबंध लिखनें को आता है तो उसमें भी लोग यही लिखते हैं गाय हमारी माता है लेकिन अब पशु अधिकार संगठन पेटा इण्डिया ने गाय को बहन बताया है. बता दें कि PETA इंडिया लगातार अपने प्रचार में हिंदुओं के खिलाफ नैरेटिव बनाने की कोशिश करता हैं।

क्या है पेटा
पेटा एक पशु-अधिकार संगठन है। इसका मुख्यालय यूएसए के वर्जिनिया के नॉर्फोल्क में स्थित है। विश्व भर में इसके लगभग 20 लाख सदस्य हैं और यह अपने आप को विश्व का सबसे बड़ा पशु-अधिकार संगठन होने का दावा करता है।