नेपाल में सियासी भूचाल, प्रधानमंत्री केपी ओली की कुर्सी जाना तय

काठमांडू, 2 जुलाई: चीन के इशारे पर काम करके नेपाली सरकार ने भारत से अपनें रिश्ते बिगाड़ने की शुरुवात की, नेपाली सरकार को अब ये फैसला बहुत भारी पड़ने जा रहा है, इसके संकेत नेपाल की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी ने दे दिए हैं।

नेपाल की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के अध्यक्ष पुष्पा कमल दहल ‘प्रचंड’ ने चेतावनी दी है कि अराजकता की मौजूदा स्थिति बनी रही तो पार्टी बिखर सकती है। प्रचंड का कहना है कि वह सरकार के काम से खुश नहीं हैं और पार्टी का काम सही तरीके से आगे नहीं बढ़ पा रहा है, इसके अलावा प्रचंड ने प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओळी का इस्तीफ़ा माँगा है।

नेपाल में सियासी हलचल तेज होती दिख रही है, प्रधानमंत्री केपी ओली लगातार अपनी कुर्सी बचाने के लिए कोशिश कर रहे हैं. इसी बीच गुरुवार को पीएम ओली ने कैबिनेट की बैठक से ठीक पहले राष्ट्रपति विद्या भंडारी से मुलाकात की. इस मुलाकात में उन्होंने मौजूदा सियासी घमासान को लेकर उनसे चर्चा की. इसके बाद सरकार की तरफ से बुलाई गई आपात कैबिनेट बैठक में मौजूदा बजट सत्र को रद्द करने का फैसला लिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, केपी ओली लगातार विपक्षी पार्टियों के निशाने पर हैं और कई नेता उनके इस्तीफे की मांग कर रहे हैं. नेताओं का कहना है कि ओली ठीक तरीके से काम नहीं कर रहे हैं. जानकारों का मानना है कि ओली की कुर्सी जाना तय है. क्योंकि कम्युनिस्ट पार्टी को ओली के इस्तीफे से कम कुछ भी स्वीकार नहीं है।

बता दें कि – हाल ही में नेपाल सरकार ने नक़्शे में संसोधन किया, भारत के कुछ इलाकों को अपने नक़्शे में शामिल कर लिया। इसके बाद सीतामढ़ी में बॉर्डर पर नेपाल की पुलिस ने भारतीय लोगों पर अंधाधुंध फायरिंग की, इसके बाद भारत और नेपाल के रिश्ते में खटास पड़नी शुरू हो गई। जानकारों का मानना है कि भारत के खिलाफ नेपाल सरकार ये सब चीन के इशारे पर कर रही है।

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